नयी दिल्ली , मई 20 -- उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कर्नाटक सरकार को वृहत्तर बेंगलुरु प्राधिकरण के चुनाव कराने के लिए 31 अगस्त तक का अंतिम समय दिया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि इसके बाद चुनाव टालने की कोई और मोहलत नहीं दी जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विमलेश पंचोली की पीठ ने यह आदेश तब दिया, जब कर्नाटक सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए और समय मांगा।
राज्य सरकार ने देश में चल रही जनगणना, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और दसवीं व बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के कारण कर्मचारियों की कमी का हवाला देते हुए 30 सितंबर तक का समय मांगा था। न्यायालय ने हालांकि इतनी लंबी मोहलत देने से इनकार कर दिया और 31 अगस्त की अंतिम समय-सीमा तय कर दी।
कर्नाटक सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायालय को बताया कि चुनाव की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन मतदाता सूची सुधारने के काम में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की वजह से प्रशासनिक दिक्कतें आ रही हैं। दूसरी तरफ, याचिकाकर्ताओं के वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पहले न्यायालय को भरोसा दिलाया था कि चुनाव 30 जून तक करा लिए जाएंगे।
विदित हो कि पहले के 'बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका' को अब नए 'वृहत्तर बेंगलुरु प्राधिकरण' में बदल दिया गया है। इसके चुनाव सितंबर 2020 में पिछला कार्यकाल खत्म होने के बाद से ही लटके हुए हैं। तब से लेकर अब तक शहर का कामकाज सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक संभाल रहे हैं। कर्नाटक सरकार ने शहरी प्रशासन में सुधार के लिए पुराने मॉडल की जगह वृहत्तर बेंगलुरु प्राधिकरण का गठन किया है, ताकि एक बड़े महानगर स्तर के प्राधिकरण के तहत कई छोटे नगर निगम काम कर सकें।
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