बेंगलुरु , जनवरी 12 -- उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक सरकार को ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) के लिए पूरी चुनाव प्रक्रिया 30 जून तक पूरी करने का कड़ा निर्देश देते हुए यह साफ कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया। पीठ ने इस मामले को लंबे समय से लंबित बताया और बेंगलुरु में चुनी हुई नागरिक प्रशासन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार को 20 फरवरी तक वार्ड-वार आरक्षण की अंतिम सूची प्रकाशित करने का निर्देश दिया, जिससे चुनाव प्रक्रिया के बाकी चरणों के लिए एक सख्त समय सीमा तय हो गयी।

कर्नाटक सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायालय को बताया कि आरक्षण का काम एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। पीठ ने इस आश्वासन पर ध्यान देते हुए औपचारिक निर्देश जारी किए और चेतावनी दी कि किसी भी और देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके समानांतर, कर्नाटक चुनाव आयोग ने उच्चतम न्यायालय के सामने एक विस्तृत रोडमैप पेश किया। इसमें कहा गया कि अंतिम मतदाता सूची 16 मार्च तक प्रकाशित की जाएगी, जबकि मतदान मई 2026 के अंत तक करने की योजना है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षाएं समाप्त होने के बाद स्कूल और कॉलेज की इमारतों को मतदान केंद्रों के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। आयोग ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि अधिकांश परीक्षाएं 26 मई के बाद समाप्त हो जायेंगी और उसके तुरंत बाद चुनाव कराए जाएंगे।

जीबीए ने हाल ही में नयी पांच-निगम प्रशासनिक संरचना के तहत सभी 369 वार्डों के लिए वार्ड-वार आरक्षण सूची का मसौदा जारी किया। कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु दक्षिण, उत्तर, पूर्व, पश्चिम और मध्य निगमों को कवर करते हुए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है, जिससे औपचारिक रूप से चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गयी है।

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