भोपाल , अप्रैल 16 -- अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय मध्यप्रदेश ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में राज्य की सभी पुलिस इकाइयों को गिरफ्तारी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के संबंध में परिपत्र जारी किया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह परिपत्र छह नवंबर 2025 को पारित न्यायालयीन आदेश के पालन में जारी किया गया है, जिसमें गिरफ्तारी के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

निर्देशों के तहत किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय पुलिस को गिरफ्तारी के ठोस कारण लिखित रूप में देना अनिवार्य किया गया है। केवल मौखिक जानकारी को पर्याप्त नहीं माना जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गिरफ्तारी के आधार ऐसी भाषा में लिखे जाएं, जिसे संबंधित व्यक्ति आसानी से समझ सके।

परिपत्र में यह भी कहा गया है कि यह लिखित जानकारी गिरफ्तारी के समय या अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने से कम से कम दो घंटे पूर्व उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके अलावा इस प्रक्रिया का उल्लेख गिरफ्तारी पंचनामा या संबंधित अभिलेख में दर्ज करना भी आवश्यक होगा।

निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि इन प्रावधानों का पालन नहीं किया गया तो गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जा सकता है। साथ ही संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अवमानना या विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।

पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों एवं संबंधित इकाइयों को निर्देशित किया है कि वे इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं, ताकि विधिसम्मत कार्रवाई के साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

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