चंडीगढ़ , अगस्त 10 -- भारतीय किसान यूनियन (मान) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद तथाऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन भूपिंदर सिंह मान ने मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को पत्र लिखकर विधानसभा में पारित ई20 पेट्रोल संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार और स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
पंजाब विधानसभा ने उन वाहनों के लिए अनिवार्य ई20 पेट्रोल के क्रियान्वयन को स्थगित करने की मांग की है, जिन्हें इसके लिए डिजाइन या प्रमाणित नहीं किया गया है। श्री मान ने कहा कि उपभोक्ताओं की माइलेज, वाहन अनुकूलता, वारंटी और ईंधन की गुणवत्ता संबंधी चिंताएं जायज हैं, लेकिन इन चिंताओं को इथेनॉल मिश्रण को पीछे लेने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब को इथेनॉल मिश्रण का विरोध करने के बजाय वैज्ञानिक परीक्षण, पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों की मांग करनी चाहिए। उनके अनुसार ऐसी नीति किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकती है।
श्री मान ने बताया कि देश में इथेनॉल मिश्रण की प्रक्रिया अचानक शुरू नहीं हुई। इसके पायलट प्रोजेक्ट वर्ष 2001 में शुरू हुए, राष्ट्रीय कार्यक्रम 2003 में लागू हुआ, जून 2022 में ई10 का लक्ष्य हासिल किया गया और फरवरी 2023 से पेट्रोल पंपों पर ई20 उपलब्ध कराया जाने लगा।
श्री भूपिंदर सिंह मान ने कहा कि पंजाब किसानों से गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकलकर वैकल्पिक फसलों की ओर जाने का आग्रह कर रहा है, लेकिन दूसरी ओर ऐसी नीति का समर्थन करना विरोधाभासी होगा जिससे वैकल्पिक फसलों के लिए उभरता बाजार कमजोर हो। उन्होंने कहा कि मक्का धान की तुलना में काफी कम पानी की मांग करता है और पंजाब सरकार इसे बढ़ावा देने के लिए 17,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दे रही है। उन्होंने कहा, "एक हाथ से मक्के को सब्सिडी देना और दूसरे हाथ से उसके बाजार को कमजोर करना स्पष्ट नीतिगत विरोधाभास है।"श्री मान ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन से चीनी मिलों और सहकारी मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर हो सकती है, गन्ना उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सकता है और ज्वार, खराब अनाज तथा कृषि अवशेषों की मांग बढ़ सकती है। उन्होंने मांग की कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के रियायती चावल को मक्के के बाजार को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही कम पानी वाली फसलों और फसल अवशेषों को प्राथमिकता देते हुए कम से कम पांच वर्ष की स्थिर फीडस्टॉक नीति बनायी जानी चाहिए।
श्री भूपिंदर सिंह मान ने कहा कि दूसरी पीढ़ी का इथेनॉल धान की पराली को औद्योगिक कच्चे माल में बदलकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है। उन्होंने कहा कि बठिंडा स्थित 100 केएलपीडी संयंत्र को पराली के संग्रह, गांठ बनाने, परिवहन और सुनिश्चित खरीद की संगठित व्यवस्था का आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाये, जिसके तहत किसान उत्पादक संगठन ( एफपीओ) और सहकारी समितियां इथेनॉल परियोजनाओं में इक्विटी हिस्सेदारी ले सकें। इससे किसान केवल कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा मूल्य शृंखला के मालिक भी बन सकेंगे।
श्री मान ने सरकार से वाहनों के मॉडल के अनुसार ईंधन के परीक्षण से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक करने, ईंधन की गुणवत्ता की कड़ाई से निगरानी करने और जहां संभव हो, ई20 के अनुकूल नहीं होने वाले वाहनों के लिए ई10 या बिना मिश्रित पेट्रोल पारदर्शी बाजार कीमत पर उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने चार और पांच अगस्त को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी। कृषि मंत्री को सौंपे गये ज्ञापन में एमएसपी, पंजाब एवं हरियाणा के किसानों के कर्ज के पुनर्गठन, आधुनिक बीजों और व्यापक राष्ट्रीय कृषि नीति की मांगें भी शामिल थीं।
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