चंडीगढ़ , जनवरी 30 -- हरियाणा सेवा अधिकार आयोग ने फरीदाबाद के सेक्टर-77 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा आयोजित ई-नीलामी से जुड़े एक मामले की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी भूखंड को ई-नीलामी में शामिल करने से पहले सभी आवश्यक विकास कार्यों का पूरा होना अनिवार्य है।

आयोग ने कहा कि यह शर्त आवंटियों की सुविधा और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

आयोग के अनुसार नागरिक सरकार पर विश्वास जताते हुए ई-नीलामी में भाग लेते हैं। ऐसे में संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे सड़क सीवरेज पानी बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराएं ताकि आवंटी बिना किसी परेशानी के निर्माण कार्य शुरू कर सकें।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आवंटन पत्र की शर्तों के अनुसार विलंबित कब्जे के कारण देय ब्याज का भुगतान समय पर नहीं किया गया था। आयोग के हस्तक्षेप के बाद इस संबंध में कार्रवाई शुरू की गई। आयोग ने एस्टेट अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे आवंटी को विलंबित ब्याज की राशि का भुगतान करें कब्जे की तिथि में आवश्यक संशोधन करें और नियमों के तहत वसूल की गई विस्तार शुल्क राशि वापस करें। इस मामले में 5 फरवरी 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।

ई-नीलामी से जुड़े अभिलेखों की जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित भूखंड को स्वच्छ दर्शाया गया था जबकि उसके सामने की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में थी। आयोग ने इस पर नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय और सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया है। मामले की जानकारी हरियाणा के मुख्य सचिव को भी दी गई है।

हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम 2014 के तहत आयोग ने प्रभावित आवंटी मनोज वशिष्ठ को 5,000 रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में एचएसवीपी सभी विकास कार्य पूरे होने के बाद ही ई-नीलामी आयोजित करेगा।

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