बैतूल , अगस्त 06 -- मध्यप्रदेश में ई-अटेंडेंस व्यवस्था के विरोध में कृषि विस्तार अधिकारियों का आंदोलन तेज हो गया है। प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत बैतूल जिले में भी दूसरे दिन अधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया और विभाग से जुड़े सभी ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार जारी रखा। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन की ओर से उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिला तो 11 अगस्त से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू की जाएगी।
आंदोलन के कारण एमपी किसान पोर्टल, उन्नति ऐप, फसल बीमा, सीएम हेल्पलाइन सहित विभाग के विभिन्न ऑनलाइन कार्य प्रभावित रहे। हालांकि कृषि विस्तार अधिकारियों ने कहा कि किसानों के हितों को देखते हुए खाद एवं बीज वितरण जैसी आवश्यक सेवाएं पूर्ववत संचालित की जा रही हैं।
आंदोलन के दूसरे दिन जिले के सभी विकासखंडों में कृषि विस्तार अधिकारियों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था का विरोध दर्ज कराया। भीमपुर विकासखंड से संध्या खन्ना, नितिन यादव, सुकाली धुर्वे, दिनेश चौहान तथा चिल्लर से विक्रम सिंह कुमरे सहित अन्य अधिकारियों ने प्रदर्शन में भाग लिया। संघ के आह्वान पर जिलेभर में ऑनलाइन कार्यों का बहिष्कार जारी रहा।
कृषि विस्तार अधिकारी संघ के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि कृषि विस्तार अधिकारियों का अधिकांश समय गांवों और किसानों के खेतों में बीतता है। ऐसे में मुख्यालय पहुंचकर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जबकि महिला अधिकारियों को दूरस्थ क्षेत्रों में कार्य के दौरान सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। उन्होंने वर्तमान 630 रुपये के साइकिल भत्ते को अपर्याप्त बताते हुए उसमें वृद्धि की मांग भी दोहराई।
संघ के अनुसार आंदोलन का अगला चरण भी तय कर दिया गया है। इसके तहत 07 से 09 अगस्त तक विभागीय व्हाट्सएप समूहों का बहिष्कार किया जाएगा, जबकि 10 अगस्त को अधिकारी केवल ऑफलाइन उपस्थिति दर्ज कर उपसंचालक कार्यालय में जमा करेंगे। इसके बाद भी मांगों पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में 11 अगस्त से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कृषि तकनीकी संविदा कर्मचारी संघ ने भी इस आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है।
वहीं कुछ किसानों का कहना है कि सामान्य दिनों में कृषि विभाग के अधिकारी गांवों में कम दिखाई देते हैं और अधिकांश दौरे विशेष अभियानों तक सीमित रहते हैं। किसानों ने उम्मीद जताई कि शासन और अधिकारियों के बीच जल्द सहमति बने, जिससे विभागीय सेवाएं पूरी तरह प्रभावित न हों।
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