अमरोहा , जून 3 -- उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण एवं विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत कैराना-कांधला क्षेत्र में यमुना तट स्थित महाभारतकालीन पुरातात्विक स्थल ईस्सोपुर टील को विकसित किए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में चार जून को भव्य 'ईस्सोपुर टील महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा।
पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह ने बुधवार को बताया कि अयोध्या, काशी और बरेली के नाथ नगरी कॉरिडोर की तर्ज पर ईस्सोपुर टील को भी धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे बुनियादी ढांचे के माध्यम से क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि महोत्सव के मुख्य अतिथि प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विकास योजना के अंतर्गत पूर्ण हुए विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया जाएगा। वीरेंद्र सिंह ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य प्राचीन धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और जीर्णोद्धार कर श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदी मंच के संयोजक डॉ. यतीन्द्र विद्यालंकार द्वारा लिखित शोधपरक पुस्तक 'काल साक्षी ईस्सोपुर टील' का विमोचन भी किया जाएगा। पुस्तक में ईस्सोपुर टील के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।
श्री सिंह ने कहा कि समारोह में देश-विदेश के पुरातत्वविदों, इतिहासकारों, साहित्यकारों और कला जगत से जुड़े अनेक विशेषज्ञों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई विशिष्ट अतिथि भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप विकास का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। ईस्सोपुर टील जैसी परियोजनाएं ग्रामीण अंचलों को पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर संतुलित विकास का मार्ग प्रशस्त करेंगी। उन्होंने बताया कि परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा समन्वित रूप से कार्य किया जा रहा है। बुनियादी ढांचे के विकास से पर्यटन, व्यापार, स्थानीय हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
श्री सिंह ने कहा कि विकास और विरासत के समन्वय की यह पहल न केवल आस्था के केंद्रों को नया स्वरूप दे रही है, बल्कि भावी पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य भी कर रही है।
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