मुंबई , मार्च 25 -- पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के जनजीवन पर भी दिखने लगा है। इसका सीधा प्रभाव शहर की प्रसिद्ध मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन की सेवाओं पर पड़ा है, जहां टिफिन डिलीवरी की मांग में गिरावट दर्ज की गई है।
गैस सिलेंडरों की कमी के कारण शहर के कई होटल और छोटे भोजनालय अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। इसका सीधा असर डब्बावालों पर पड़ा है, क्योंकि उनके लगभग 30 प्रतिशत ग्राहक ऐसे ही बाहरी मेस और भोजन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
करीब 150 वर्षों से सक्रिय डब्बावाला सेवा को मुंबई की जीवनरेखा माना जाता है। लगभग 1,500 डब्बावाले मिलकर रोजाना करीब 80,000 ग्राहकों तक टिफिन पहुंचाते हैं, जिनमें 70 प्रतिशत ग्राहक घर का बना खाना लेते हैं, जबकि बाकी बाहरी भोजन सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
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