श्रीनगर , मार्च 05 -- नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ईरान में फंसे छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारत के साथ लगातार समन्वय कर रहे हैं।

श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में श्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास जारी हैं और फिलहाल उन्हें अधिक सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र की स्थिति अब युद्ध का रूप ले चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान पर कब्जा करना चाहता है और चेतावनी दी कि ऐसे संघर्ष के परिणाम अच्छे नहीं होंगे।

उन्होंने कहा, "जो लोग ईरान में फंसे हैं, वे सुरक्षित लौटेंगे। इसके लिए उमर साहब विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में हैं। छात्रों को पहले संवेदनशील इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। उन्हें पहले जमीनी मार्ग से पड़ोसी देशों में ले जाया जाएगा और वहां से हवाई मार्ग से भारत लाया जाएगा।"इस बीच कश्मीर में उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिनके बच्चे ईरान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवारों ने सरकार से अपील की है कि बढ़ते तनाव के बीच छात्रों को जल्द सुरक्षित निकाला जाए।

अधिकारियों के अनुसार, भारतीय दूतावास द्वारा जारी परामर्श के बाद कई कश्मीरी छात्र पहले ही लौट चुके हैं, लेकिन अभी भी कई छात्र वहां फंसे हुए हैं।

इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से कई छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में इंटर्नशिप कर रहे कुछ अंतिम वर्ष के मेडिकल छात्रों ने शुरुआत में वहां से जाने से इनकार कर दिया था क्योंकि वे अपने कार्यस्थल को सुरक्षित मान रहे थे। हालांकि चौथे और पांचवें वर्ष के कुछ छात्रों को उनके मेडिकल कॉलेजों से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। मुख्यमंत्री के अनुसार कॉलेज प्रशासन ने छात्रों से कहा कि यदि वे अभी चले गए तो उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष व्यर्थ हो सकता है और उन्हें वर्ष दोहराना पड़ सकता है।

जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन के मुताबिक ईरान में 2,000 से अधिक कश्मीरी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से लगभग 95 प्रतिशत मेडिकल पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं।

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