तेहरान , अक्टूबर 25 -- ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने चेतावनी दी है कि देश की क्षेत्रीय अखंडता का किसी भी तरह का उल्लंघन किए जाने पर 'दुश्मन की कल्पना से परे करारा जवाब दिया जाएगा'। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पूर्ण युद्ध या हत्याओं की धमकियां देश को उसके अधिकारों और हितों से पीछे हटने पर मजबूर नहीं कर सकतीं हैं।
संसद सत्र की शुरुआत करते हुए श्री कालीबाफ ने कहा, "हम डरने वाले नहीं हैं और अपने महान ईरान की क्षेत्रीय अखंडता के किसी भी उल्लंघन का दुश्मन की कल्पना से परे जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"उन्होंने कहा कि पूर्ण पैमाने पर युद्ध या हत्या की धमकियां ईरानी लोगों को पीछे हटने पर मजबूर नहीं करेंगी, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के दबाव के आगे झुकने से ईरान के इनकार का स्पष्ट संकेत देता है।उन्होंने कहा, "पूर्ण युद्ध या हत्या की धमकियां ईरानी राष्ट्र को अपने अधिकारों और हितों से पीछे हटने के लिए बाध्य नहीं करेंगी।"श्री कालीबाफ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अपनी 'गलतफहमियों' और ईरान के खिलाफ उकसावे वाले युद्ध के जरिए 'खुद के पैदा किए गए संकट में फंस गया है'। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान के बजाय अब अमेरिका को 'खुद को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है'।
संसद अध्यक्ष ने कहा कि इससे पहले कि ईरान अमेरिका के किसी दावे को विश्वसनीय माने, अमेरिका को अपना आचरण बदलना होगा, अपनी 'धौंस जमाने और हिंसक नीतियों' को छोड़ना होगा और अपने द्वारा तोड़ी गई प्रतिबद्धताओं की व्यावहारिक भरपाई करनी होगी।
उन्होंने कहा, "जब तक अमेरिकी अपना व्यवहार नहीं बदलते, अपनी प्रभुता और हिंसक रवैये का त्याग नहीं करते और अपनी तोड़ी गई प्रतिबद्धताओं की व्यावहारिक, ठोस और वास्तविक भरपाई नहीं करते, तब तक उनका कोई भी दावा ईरान के लिए रत्ती भर भी विश्वसनीय नहीं होगा।"श्री कालीबाफ ने कहा, "ईरान के पास कहने के लिए कुछ नया नहीं है।"उन्होंने कहा कि अमेरिका यह समझने में पूरी तरह विफल रहा है कि राजशाही के दौर की तुलना में ईरान में कितना मौलिक बदलाव आ चुका है, जब देश के मामलों पर अमेरिका का खासा प्रभाव हुआ करता था।
श्री कालीबाफ ने कहा, "आज हमारा प्यारा ईरान न केवल पश्चिमी और पूर्वी सलाहकारों का उपनिवेश बनने से मुक्त है, बल्कि एक स्वतंत्र और शक्तिशाली क्षेत्रीय ताकत है।" उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियों और इजरायल के ईरान के भविष्य को फिर से तय करने की उम्मीद उनके लिए केवल एक 'दुःस्वप्न' बनकर रह गई है।
श्री कालीबाफ ने ईरान के संस्थापक आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी की विरासत का जिक्र करते हुए पूर्व राजशाही के उस कानून के खिलाफ उनके विरोध को याद किया, जिसने अमेरिकी सैन्यकर्मियों और उनके सहयोगियों को ईरान में कानूनी कार्रवाई से छूट दी थी।उन्होंने कहा कि श्री खुमैनी ने उस कदम को ईरान की स्वतंत्रता और गरिमा पर हमला बताते हुए उसकी कड़ी निंदा की थी और पूर्व शासन पर अमेरिकी और इजरायली प्राथमिकताओं के लिए राष्ट्रीय हितों की बलि देने का आरोप लगाया था।
श्री कालीबाफ ने तर्क दिया कि उस घटना ने अमेरिकी नीति और इजरायली हितों के बीच के संबंध को साबित किया था। उन्होंने कहा कि ईरान पर प्रतिबंध, हत्याएं और सैन्य और आर्थिक दबाव विदेशी शक्तियों के देश पर वर्चस्व कायम करने की निरंतर कोशिश को दर्शाते हैं।
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