अबू धाबी , मई 15 -- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अमेरिका-इजरायल के ईरान के खिलाफ अभियान शुरू करने के तुरंत बाद साथी खाड़ी देशों को ईरान पर समन्वित हमले में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें विफल रहा था।
ब्लूमबर्ग एजेंसी की आज की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है।
एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सहित क्षेत्र के अन्य राष्ट्राध्यक्षों को फोन किया था और ईरान के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने का तर्क दिया था। उनके समकक्षों ने हालांकि इस पहल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था। इन देशों के इनकार से यूएई और अन्य खाड़ी देशों के बीच हाल ही में आयी दरार के साथ-साथ अप्रैल में ओपेक छोड़ने के अमीरात के फैसले की व्याख्या की जा सकती है। इससे छह दशकों का सहयोग समाप्त हो गया।
मामले से परिचित लोगों का हवाला देते हुए एजेंसी ने बताया कि सऊदी अरब ने मार्च में ईरान पर हमला किया था, लेकिन उसके तुरंत बाद उसने अपना रुख बदला और पाकिस्तान के नेतृत्व वाले मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन करना शुरू कर दिया।
रिपोर्टों के अनुसार, यूएई इस प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित न किये जाने पर नाराज था। कतर ने भी ईरान की ओर से उसके दुनिया के सबसे बड़े लिक्विड प्राकृतिक गैस संयंत्र रास लफान पर हमला किये जाने के बाद जवाबी सैन्य कार्रवाई पर विचार किया था। उसने हालांकि ऐसा न करने का फैसला किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित