जिनेवा , मार्च 27 -- ईरान ने शुक्रवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र को संबोधित करते हुए अमेरिका-इजरायल पर दक्षिण ईरान में लड़कियों के स्कूल पर 'जानबूझकर और इरादतन' हमला करने का आरोप लगाया। ईरान ने इसे 'युद्ध अपराध' और 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निरंतर चुप्पी वैश्विक संस्थानों और मानदंडों को कमजोर करेगी।
उन्होंने कहा, "संयुक्त राष्ट्र और जिन मूल मूल्यों का यह प्रतिनिधित्व करता है... वे गंभीर खतरे में हैं।" उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे "आक्रामक देशों की पहचान करें और उन्हें बतायें कि राष्ट्रों का संगठन... ईरानियों के खिलाफ किये जा रहे इन घृणित अपराधों के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराता है।"विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आगे कहा, "ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा... फिर भी इसने अपनी रक्षा के लिए पूर्ण संकल्प और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आत्मरक्षा "जब तक आवश्यक हो तब तक जारी रहेगी।"एक आपातकालीन चर्चा में बोलते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान "दो दबंग परमाणु हथियार संपन्न देशों, अमेरिका और इजरायल के थोपे अवैध युद्ध की पीड़ा झेल रहा है।" उन्होंने इस संघर्ष को 'पूरी तरह से अनुचित और क्रूर' बताया।
उन्होंने कहा कि शत्रुता 28 फरवरी को तब शुरू हुई, जब ईरान-अमेरिका कूटनीतिक बातचीत में लगे हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने 'बातचीत की मेज को नष्ट कर नौ महीने के भीतर दूसरी बार कूटनीति के साथ विश्वासघात कियाश्री अराघची ने आरोप लगाया कि दक्षिण ईरान के मीनाब में 'शजरे तय्यबे एलीमेंट्री स्कूल' को 'नियोजित और चरणबद्ध हमले' का निशाना बनाया गया, जहां "175 से अधिक छात्रों और शिक्षकों की बेरहमी से हत्या कर दी गयी। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब अमेरिकी-इजरायली हमलावरों के पास सबसे उन्नत तकनीकें मौजूद हैं... कोई भी इस बात पर विश्वास नहीं कर सकता कि स्कूल पर हमला जानबूझकर और इरादतन किये गये कृत्य के अलावा कुछ और था।" उन्होंने आगे कहा, "शजरे तय्यबे स्कूल को निशाना बनाना युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध है- एक ऐसा अपराध, जो सभी के स्पष्ट निंदा और दोषियों की जवाबदेही की मांग करता है।"ईरानी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया, "इस हमले को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसे छिपाया नहीं जा सकता और इस पर चुप्पी या उदासीनता नहीं बरती जानी चाहिए।" उन्होंने इस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया कि यह कोई गलती थी। उन्होंने कहा, "यह महज कोई 'घटना' या 'गलत गणना' नहीं थी।"ईरान ने संघर्ष के दौरान नागरिक बुनियादी ढांचे पर व्यापक हमलों का भी आरोप लगाया। श्री अराघची ने कहा, "मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित रूप से उल्लंघन किया गया है।" उन्होंने अमेरिकी-इजरायली बलों पर 'युद्ध के नियमों की परवाह किए बिना नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने' का आरोप लगाया।
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