बेरूत/यरूशलम , जून 06 -- ईरान ने शनिवार को लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के बयान को लेकर उनकी आलोचना की है।

गौरतलब है कि श्री जोसेफ औन ने तेहरान पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल 'मोल-भाव के मोहरे' के तौर पर कर रहा है। वहीं, संघर्ष-विराम की कोशिशों के बावजूद इज़रायल ने दक्षिणी लेबनान में नये हवाई हमले किए और लोगों को वहां से निकलने का आदेश दिया।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने जोसेफ पर 'राजनीतिक धोखे' का आरोप लगाया। श्री बघाई ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "वह अपने साथ खड़े व्यक्ति को बेच देता है और अपने खिलाफ खड़े व्यक्ति को खरीद लेता है। वह उसका साथ छोड़ देता है जिसने उसका समर्थन किया था और उसका अनुसरण करता है जिसने उसका गला घोंटा था।"उल्लेखनीय है कि संघर्ष-विराम लागू होने के बावजूद इज़राइली लड़ाकू विमानों ने लेबनान की पश्चिमी बेका घाटी के सहमार शहर में दो हवाई हमले किए, जिनमें एक शिया धार्मिक हॉल और एक स्काउट मुख्यालय को निशाना बनाया गया।

लेबनान के सरकारी मीडिया ने संपत्ति को भारी नुकसान की खबर दी, लेकिन किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में टूटी हुई दुकानें, क्षतिग्रस्त रिहायशी इमारतें और घटनास्थल पर काम करते हुए आपातकालीन कर्मी दिखाई दिए।

इज़रायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अरमाती, मशगारा, काफ़्र हुना, सजाद और अंसारिया के निवासियों के लिए भी नए निकासी आदेश जारी किए। इज़रायली सेना के अरबी प्रवक्ता अविचय अद्राई ने एक्स पर एक पोस्ट में गांवों और कस्बों के निवासियों को तुरंत वहां से निकलने और ज़हरानी नदी के उत्तर की ओर जाने का निर्देश दिया।

ये घटनाक्रम हिज़्बुल्लाह द्वारा अमेरिका में इज़रायली और लेबनानी वार्ताकारों के बीच तय किए गये अमेरिका-मध्यस्थता वाले संघर्ष-विराम ढांचे को खारिज करने के एक दिन बाद सामने आया।

समाचार चैनल अल जज़ीरा ने रोम की अमेरिकी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर एंड्रिया डेसी के हवाले से कहा कि ऐसा लगता है कि लेबनान में लड़ाई खत्म करने के लिए जिस ढांचे पर समझौता हुआ था और जिसे हिज़्बुल्लाह ने खारिज कर दिया था, उसे शायद जानबूझकर विफल होने के लिए डिज़ाइन किया गया था, ताकि इज़रायल को लेबनान में कार्रवाई की अधिक स्वतंत्रता मिल सके और इस प्रक्रिया में अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता को भी कमजोर किया जा सके।

लेबनान की सेना ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में खारदली-नबातीह रोड पर उनके मिलिट्री वाहन पर हुए इज़रायली हमले में एक अफ़सर समेत कई सैनिक मारे गए। इज़रायल द्वारा नौ गांवों को खाली करने के आदेश जारी किए जाने के बाद दक्षिणी लेबनान से हज़ारों आम नागरिक पलायन कर गये हैं। इन गांवों में 2,500 से ज़्यादा विस्थापित लोग शरण लिए हुए थे।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इज़रायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में नबातीह इलाक़े और कफ़र तेबनित के आस-पास हवाई और ड्रोन हमले किय। मीडिया रिपोर्टों में हिज़्बुल्लाह के हवाले से कहा गया कि उसने इसका जवाब देते हुए ब्यूफ़ोर्ट कैसल के पास इज़रायली सैनिकों पर रॉकेट दागे; यह एक रणनीतिक जगह है जिस पर इस हफ़्ते की शुरुआत में इज़राइली सेना ने कब्ज़ा कर लिया था।

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ़ सलाम ने कहा कि लेबनान अब बाहरी झगड़ों का अखाड़ा नहीं बन सकता और उन्होंने देश के दक्षिण में आम नागरिकों की तकलीफ़ों को खत्म करने की अपील की।

संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी ने फिर कहा कि हिज़्बुल्लाह तभी लितानी नदी के दक्षिण के इलाक़ों से हटेगा जब इज़राइली सेना भी लेबनान की ज़मीन से हट जाए और कोई भी युद्धविराम बिना किसी शर्त के हो। फिर से शुरू हुई सैन्य झड़पों और गहरे होते राजनीतिक मतभेदों ने इस डर को बढ़ा दिया है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्धविराम की कोशिशें नाकाम हो सकती हैं, जिससे लेबनान और अस्थिर हो सकता है और इज़राइल, हिज़्बुल्लाह और ईरान के बीच बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का ख़तरा बढ़ सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित