तेहरान , अगस्त 27 -- ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अमेरिकी प्रतिबंधों के मानवीय और मानवाधिकार संबंधी प्रभावों की जांच कराने की मांग करते हुए अमेरिका पर ऐसे एकतरफा आर्थिक दबाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, जिससे आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस, सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष और सदस्य देशों को भेजे पत्र में संयुक्त राष्ट्र से अमेरिका के हालिया प्रतिबंधों के प्रभावों का आकलन कर रिपोर्ट जारी करने का आग्रह किया।

ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में श्री अराघची ने अमेरिकी प्रतिबंध अभियान को 'राज्य और आर्थिक आतंकवाद की कार्रवाई' करार दिया और वाशिंगटन पर तेहरान के खिलाफ अवैध, एकतरफा और जबरन लागू किये गये आर्थिक उपायों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों से जानबूझकर आम नागरिकों को नुकसान पहुंच रहा है, क्योंकि इनके कारण भोजन, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं तक पहुंच प्रभावित हो रही है। इससे जीवन, स्वास्थ्य, भोजन और पर्याप्त जीवन स्तर जैसे अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

श्री अराघची ने संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधों के कारण खाद्य पदार्थों, दवाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, ऊर्जा, परिवहन, मानवीय सहायता और अन्य बुनियादी जरूरतों तक पहुंच पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच करने को कहा।

उन्होंने सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से एकतरफा जबरन लागू किये जाने वाले उपायों तथा दूसरे देशों पर लागू किये जा रहे प्रतिबंधों की निंदा करने की भी अपील की। उन्होंने सरकारों से ऐसे प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देने और लागू नहीं करने का आग्रह किया, जिनका उद्देश्य देशों को ईरान के साथ वैध आर्थिक और व्यापारिक संबंध बदलने के लिए मजबूर करना है।

ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका से तीसरे देशों और कंपनियों पर तेहरान के साथ आर्थिक संबंध कम करने का दबाव बंद करने तथा प्रतिबंधों से हुए नुकसान के लिए मुआवजा देने की भी मांग की। यह अपील ऐसे समय आयी है, जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने प्रतिबंध अभियान को तेज कर दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अभियान में विमानन, जहाजरानी, प्रौद्योगिकी, सोना और डिजिटल संपत्ति जैसे क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का कहना है कि उसके उपाय ईरानी सरकार और उससे जुड़े संगठनों के खिलाफ हैं, जबकि ईरान का कहना है कि इनका अंतिम बोझ आम ईरानियों पर पड़ता है।

इस राजनयिक टकराव के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी विवाद जारी है। ईरान ने कहा है कि जून में हुए समझौते के तहत अमेरिका द्वारा प्रतिबंध हटाने और ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करने जैसी प्रतिबद्धताएं पूरी किये जाने तक जलडमरूमध्य पूरी तरह नहीं खोला जाएगा।

उधर, अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खुला रखने की मांग की है। संघर्ष शुरू होने से पहले जहां इस मार्ग से प्रतिदिन करीब दो करोड़ बैरल तेल गुजरता था, वहीं सोमवार को यह प्रवाह घटकर करीब 50 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।

कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल सानी गुरुवार को तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात के दौरान होर्मुज में नौवहन की स्थिति पर चर्चा करेंगे। इससे पहले ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने अराघची से मुलाकात की थी। इसके बाद ईरान ने कहा था कि दोनों देशों ने जलडमरूमध्य के रास्ते अस्थायी वैकल्पिक नौवहन मार्ग पर सहमति जतायी है।

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