तेहरान , जुलाई 13 -- ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका ने बहुत ही कम समय में इस्लामाबाद ज्ञापन के अहम हिस्सों को कमजोर कर दिया है और मस्कट में हुई बातचीत सिर्फ़ होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थी तथा उसमें किसी अन्य मामले पर चर्चा नहीं हुई थी।

श्री बघाई ने अपने साप्ताहिक मीडिया संबोधन में ईरान की विदेश नीति में हालिया घटनाक्रमों पर जानकारी दी जिसमें ज्ञापन की स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे, राजनयिक प्रयास एवं पड़ोसी देशों के साथ संबंध शामिल थे। श्री बघाई ने ईरान के विरोधियों के बयानों की आलोचना करते हुए उन पर आरोप लगाया कि वे ज़िम्मेदारी से बचते हुए खुद को पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों से इन घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बारे में जनता की राय नहीं बदलेगी।

जब पूछा गया कि क्या ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी के अनुरोध पर निरीक्षकों को वापस लौटने और क्षतिग्रस्त परमाणु सुविधाओं का निरीक्षण करने की अनुमति देगा तो बघाई ने जवाब दिया कि ईरान सहमति नहीं देगा। श्री बघाई ने इस्लामाबाद ज्ञापन पर बात करते हुए कहा कि समझौता एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करने वाला पहला पक्ष नहीं था।

उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए गंभीरता और नेक नीयत से बातचीत में हिस्सा लिया। श्री बघाई के अनुसार, अमेरिका अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहा और समझौता होने के कुछ ही समय बाद ही उससे पीछे हटने लगा।

श्री बघाई ने ईरान के "प्रतिबद्धता के बदले प्रतिबद्धता" वाले रुख को दोहराते हुए कहा कि तेहरान अपनी ज़िम्मेदारियां तभी तक पूरी करता रहेगा जब तक दूसरी पार्टी भी अपने वादों का पालन करती रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि ईरान पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता और जब तक दूसरी पार्टी अपने वादों को तोड़ती रहेगी तब तक ईरान अपनी ज़िम्मेदारियों को लागू नहीं करेगा।

श्री बघाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान मस्कट में परमाणु मुद्दों और होर्मुज जलडमरूमध्य सहित सभी मामलों पर सहमत हुआ था और इसके दो घंटे बाद ही कथित रूप से जहाजों पर हमला कर दिया। श्री बघाई ने कहा कि झूठ बोलना अमेरिकी अधिकारियों की आदत बन गई है।

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