एवियां-ले-बैं (फ्रांस) , जून 16 -- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तय 60 दिन की अवधि से पहले भी वार्ता पूरी हो सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले सकती है।

श्री ट्रंप ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वार्ता की समय-सीमा आगे-पीछे हो सकती है। उन्होंने कहा, "यह जल्दी भी पूरी हो सकती है और ज्यादा समय भी लग सकता है, लेकिन इसके जल्दी पूरा होने की संभावना है।"अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) आगे की बातचीत के लिए एक रूपरेखा तय करता है। इसपर शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने के बाद 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत कई लंबित मुद्दों पर चर्चा की जायेगी।

श्री ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी संतोष जताते हुए कहा कि कई महीनों की बाधाओं के बाद अब समुद्री यातायात सामान्य होने लगा है। उन्होंने कहा, "अच्छी चीजें हो रही हैं। जहाजों की आवाजाही शुरू हो चुकी है और शुक्रवार तक जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जायेगा। तेल की आपूर्ति बहाल हो रही है, कीमतें तेजी से नीचे आ रही हैं और शेयर बाजार में भी मजबूती देखी जा रही है।"सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ तेल टैंकरों ने हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरना शुरू किया है, जिनमें अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाला कम से कम एक ईरानी जहाज भी शामिल है, लेकिन अधिकांश बड़ी शिपिंग कंपनियां अब भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। उद्योग जगत से जुड़े संगठनों का कहना है कि वे अमेरिका-ईरान समझौते की शर्तों पर अधिक स्पष्टता मिलने के बाद ही सामान्य परिचालन बहाल करेंगे।

श्री ट्रंप ने कहा कि वह अगले कुछ दिनों में समझौता ज्ञापन का पूरा पाठ सार्वजनिक करेंगे और संभव है कि स्वयं प्रेस वार्ता कर उसे शब्दशः पढ़कर सुनाएं। उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ इसे जारी ही नहीं करूंगा, बल्कि संभव है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे शब्द-दर-शब्द पढ़कर सुनाऊं ताकि मीडिया इसे सही तरीके से प्रस्तुत करे।"श्री ट्रंप ने इस समझौते को महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए इसकी तुलना 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते (जेसीपीओए) से की। उन्होंने कहा, "ओबामा का समझौता पश्चिम एशिया को अस्थिर करने वाला था। वह परमाणु हथियारों की ओर जाने का रास्ता था, जबकि मेरा समझौता परमाणु हथियारों के खिलाफ एक मजबूत दीवार है।"श्री ट्रंप ने कहा कि वह समझौते का पाठ तभी सार्वजनिक करना चाहते हैं जब उसे औपचारिक मंजूरी मिल जाये। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि पहले इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो जाये, उसके बाद ही इसे सार्वजनिक किया जाये।"उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि अमेरिकी कांग्रेस भी इस समझौते को मंजूरी दे, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इसे औपचारिक मतदान के लिए पेश किया जाएगा या नहीं। उन्होंने कहा, "भला कौन होगा जो इसका समर्थन नहीं करेगा?"अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि यह समझौता कोई अंतिम समाधान नहीं, बल्कि आगे की बातचीत के लिए एक प्रारंभिक ढांचा है। इसके तहत युद्धविराम को आगे बढ़ाने, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर विस्तृत वार्ता शुरू करने का रास्ता तैयार किया जायेगा।

इस बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि इज़रायल आखिरकार अमेरिका-ईरान के बीच बन रहे समझौते का समर्थन करेगा।

श्री वेंस ने सोमवार को कई टेलीविज़न साक्षात्कारोंं में कहा कि इस समझौते से क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ेगी और आखिरकार इज़रायल को फ़ायदा होगा।

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