वियना , मार्च 30 -- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने सोमवार को पुष्टि की कि ईरान में खोंदाब स्थित 'हैवी वाटर' उत्पादन संयंत्र गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है और अब चालू हालत में नहीं है।

उल्लेखनीय है कि हैवी वाटर (ड्यूटेरियम ऑक्साइड) का इस्तेमाल परमाणु संयंत्रों में परमाणु विखंडन प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह परमाणु रिएक्टर में न्यूट्रॉन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आईएईए ने कहा कि इस संयंत्र में कोई घोषित परमाणु सामग्री मौजूद नहीं है। एजेंसी के अनुसार, "उपग्रह चित्रों के स्वतंत्र विश्लेषण और संयंत्र की जानकारी के आधार पर यह पुष्टि हुई है कि खोंदाब स्थित 'हैवी वाटर' उत्पादन संयंत्र को भारी नुकसान पहुँचा है और यह अब कार्य करने की स्थिति में नहीं है।"ईरान ने 28 मार्च को आईएईए को सूचित किया था कि 27 मार्च को खोंदाब स्थित इस संयंत्र पर हमला हुआ था। चूंकि वहां कोई घोषित परमाणु सामग्री नहीं थी, इसलिए विकिरण का कोई खतरा नहीं देखा गया। खोंदाब संयंत्र मध्य ईरान के मरकजी प्रांत में अराक शहर से 55 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है और यह अराक परमाणु परिसर (जिसे आईआर-40 सुविधा के रूप में भी जाना जाता है) का हिस्सा है।

ईरान ने यह भी बताया कि खुज़ेस्तान स्टील उत्पादन कारखाने पर भी हमले हुए, जहाँ सीलबंद कोबाल्ट-60 (सीओ 60) और सीज़ियम-137 (सीएस 137) जैसे रेडियोधर्मी तत्वों का उपयोग किया जाता है, हालांकि वहां से भी कोई विकिरण नहीं फैला। इसके अलावा, बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के क्षेत्र में भी हमले की सूचना मिली है, जो 10 दिनों में ऐसी तीसरी घटना है। आईएईए के मुताबिक, चालू रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं हुआ है और संयंत्र की स्थिति सामान्य है।

आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास सैन्य गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि रिएक्टर क्षतिग्रस्त होता है, तो यह एक बड़ी रेडियोधर्मी घटना का कारण बन सकता है। उन्होंने परमाणु दुर्घटना के जोखिम से बचने के लिए सैन्य संयम बरतने का आह्वान किया है।

खोंदाब संयंत्र को ईरान की सबसे रणनीतिक परमाणु सुविधाओं में से एक माना जाता था क्योंकि यह परमाणु हथियार के लिए संभावित 'प्लूटोनियम' प्रदान करता था। इसका हैवी वाटर अनुसंधान रिएक्टर (आईआर-40) मूल रूप से प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जिससे उप-उत्पाद के रूप में हथियार-ग्रेड का प्लूटोनियम प्राप्त होता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित