न्यूयॉर्क , मई 16 -- ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा उत्पन्न होने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बिगड़ने के लिए सिर्फ वे जिम्मेदार हैं जिन्होंने पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू किया है।

संयुक्त राष्ट्र (संरा) में ईरान के राजदूत एवं स्थायी प्रतिनिधि आमिर सईद इरावानी ने संरा के आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के एक विशेष सत्र के दौरान यह टिप्पणी की।

श्री इरावानी ने "ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह की सुरक्षा : अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए वैश्विक विकास का समर्थन" शीर्षक के साथ आयोजित सत्र में कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजारों, आपूर्ति शृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ईरान पर एक साल से भी कम समय में दो गैर-कानूनी हमले हुए हैं, जिससे वह 'दो गहरे और आपस में जुड़े हुए' तरीकों से प्रभावित हुआ है।

उन्होंने कहा कि इन हमलों में महिलाओं एवं बच्चों सहित हजारों लोगों की मौत हुई और नागरिक, आर्थिक, ऊर्जा एवं पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील अवसंरचनाओं को नुकसान हुआ। सैन्य अभियान खत्म होने के बाद भी इस संघर्ष के परिणाम बरकरार रहेंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्रीय एवं वैश्विक अस्थिरता के मूल कारणों की जांच होनी चाहिए।

श्री इरावानी ने कहा, "वर्तमान अस्थिरता अचानक नहीं हुई। इसके पीछे इजरायली शासन एवं अमेरिका द्वारा थोपे गये सैन्य संघर्ष एवं अवैध हमलों का हाथ है।" उन्होंने जोर दिया कि ईरान के तेल, गैस एवं पेट्रोकेमिकल इकाइयों पर हुए सीधे हमलों ने वैश्विक ऊर्जा एवं उर्वरक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित किया है। इसके अलावा प्रतिबंधों और अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी ने वैश्विक व्यापार एवं पण्य बाजार को चोट पहुंचाई थी।

उन्होंने कहा कि तनाव के बावजूद ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में आम समुद्री परिस्थितियां, ऊर्जा सुरक्षा एवं स्थिरता लाने के लिए "रचनात्मक जुड़ाव" पर काम करने को तैयार है। उसकी शर्त है कि सैन्य हमले रुक जाएं और ईरान पर लगे प्रतिबंध भी हटा लिये जाएं। उन्होंने ईरान का रुख स्पष्ट करते हुए कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य में वर्तमान स्थिति और उसके वैश्विक आर्थिक परिणाम के लिए ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने वाले और उसके क्षेत्रीय साझेदार जिम्मेदार हैं।"उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात पर नियंत्रण कठोर कर दिया है। इस देश ने अमेरिका के प्रतिबंधों और समुद्री पाबंदियों के बाद और भी कड़े कदम उठाए हैं।

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