वाशिंगटन , मई 12 -- अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान पर अमेरिका का खर्च बढ़कर लगभग 29 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
युद्ध मामलों के अवर सचिव और कार्यवाहक मुख्य वित्तीय अधिकारी जूल्स डब्ल्यू हर्स्ट तृतीय ने प्रतिनिधि सभा की रक्षा विनियोग उपसमिति की सुनवाई में कहा कि अप्रैल के अंत में अनुमानित 25 अरब डॉलर की तुलना में अब लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
श्री हर्स्ट ने कहा कि नये आंकड़े सैन्य उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन की बढ़ी हुई लागत तथा तैनात सैनिकों को बनाए रखने के परिचालन खर्च को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
उन्होंने कहा, "उस समय अनुमान 25 अरब डॉलर था लेकिन संयुक्त स्टाफ और नियंत्रक दल लगातार लागत का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं और अब हमें लगता है कि यह लगभग 29 अरब डॉलर के करीब पहुंच चुका है।"उन्होंने सुनवाई में कहा कि यह वृद्धि उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन की अद्यतन लागत तथा क्षेत्र में तैनात सैनिकों के परिचालन खर्च के कारण हुई है।
कुल खर्च में वायु और नौसैनिक अभियान, हथियारों का उपयोग, रसद व्यवस्था तथा अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों को दिया गया समर्थन शामिल है। अधिकारियों के अनुसार अत्याधुनिक निर्देशित हथियारों के अपेक्षा से अधिक इस्तेमाल, विमानों और नौसैनिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव तथा त्वरित मरम्मत की जरूरतों ने लागत बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।
सुनवाई के दौरान सांसदों ने खर्च का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सवाल उठाए और युद्ध संबंधी व्ययों में पारदर्शिता तथा निगरानी को लेकर चिंता व्यक्त की।
रिपोर्ट के अनुसार 29 अरब डॉलर के इस अनुमान में पूर्व सैनिकों की देखभाल, पुनर्निर्माण या भविष्य में संभावित सैन्य तैनाती जैसी दीर्घकालिक लागत शामिल नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि अभियान जारी रहा या इसका विस्तार हुआ तो कुल वित्तीय बोझ और अधिक बढ़ सकता है।
पेंटागन अधिकारियों ने कहा कि लागत में तेज वृद्धि का मुख्य कारण अत्याधुनिक निर्देशित हथियारों का अपेक्षा से अधिक उपयोग, विमानों और नौसैनिक परिसंपत्तियों पर बढ़ता दबाव तथा ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेज मरम्मत कार्य हैं।
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