रमेश भान सेनयी दिल्ली , अप्रैल 23 -- ईरान की न्यायपालिका ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके हस्तक्षेप के बाद आठ महिलाओं की प्रस्तावित फांसी रोक दी गई। ईरान ने इन दावों को "फर्जी खबर" और "मनगढ़ंत" बताया है।
ईरान की न्यायपालिका के आधिकारिक माध्यम 'मिज़ान' के अनुसार, श्री ट्रंप द्वारा जिन महिलाओं का उल्लेख किया गया, उनमें से किसी को भी मृत्युदंड नहीं दिया गया था और न ही उन्हें फांसी की सजा सुनाई गयी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ महिलाएं पहले ही रिहा हो चुकी हैं, जबकि अन्य पर ऐसे आरोप हैं जिनमें कारावास की सजा हो सकती है, न कि मृत्युदंड।
मिज़ान ने आरोप लगाया कि श्री ट्रंप अपुष्ट सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित दावों से "भ्रमित" हुए हैं और वास्तविक वार्ताओं में प्रगति के अभाव को छिपाने के लिए उपलब्धियों का बखान कर रहे हैं।
यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब श्री ट्रंप ने 22 अप्रैल की देर रात ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जिन आठ महिलाओं को फांसी दी जानी थी, उन्हें अब नहीं मारा जाएगा। उन्होंने दावा किया कि चार महिलाओं को तुरंत रिहा किया जाएगा, जबकि अन्य चार को एक महीने के कारावास की सजा दी जाएगी।
इससे पहले उन्होंने उसी दिन सुबह ईरानी नेतृत्व से इन महिलाओं को रिहा करने की अपील की थी और इसे संभावित वार्ता के लिए सकारात्मक शुरुआत बताया था।
मानवाधिकार संगठनों ने यह संकेत दिया है कि हाल के विरोध प्रदर्शनों में गिरफ्तार कम से कम एक महिला को मृत्युदंड सुनाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह श्री ट्रंप द्वारा उल्लिखित व्यक्तियों में शामिल है या नहीं।
ईरानी अधिकारियों ने इस पूरे दावे को "साख बचाने की कोशिश" बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि न्यायपालिका एक स्वतंत्र संस्था है, जो किसी विदेशी नेता के निर्देश पर कार्य नहीं करती।
ईरान के महान्यायवादी मोहम्मद मुवाहिदी आज़ाद ने भी इन दावों को "पूरी तरह असत्य" बताया। वहीं, तेहरान के धार्मिक नेता मोहम्मद जावेद हाजी अली अकबरी ने भी श्री ट्रंप के कथन को निराधार बताया।
इस बीच, मिज़ान के अनुसार, ईरान की नागरिक सुरक्षा इकाई के एक वरिष्ठ अधिकारी मेहदी फरीद को इजरायल की खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद फांसी दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सजा बरकरार रखने के बाद उसे मृत्युदंड दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, फरीद ने जांच के दौरान संवेदनशील सूचनाएं, जिनमें संगठनात्मक ढांचा, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मियों से जुड़ी जानकारी शामिल थी, इजरायली खुफिया तंत्र को देने की कोशिश स्वीकार की थी।
इसके अलावा, 21 अप्रैल को तेहरान के बाहर एक कारागार में मोहम्मद मासूम शाही और हमीद वलीदी को भी मृत्युदंड दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, 19 मार्च के बाद से अब तक कम से कम 15 राजनीतिक बंदियों को फांसी दी जा चुकी है।
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