वाशिंगटन , अप्रैल 23 -- ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री घेराबंदी को और सख्त करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसने 'ईरान के विरुद्ध अमेरिकी घेराबंदी के हिस्से के रूप में 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।'वापस लौटाये गये जहाजों में अधिकांश तेल टैंकर बताये जा रहे हैं।
गुरुवार को एक ताजा परिचालन जानकारी जारी करते हुए सेंटकॉम ने कहा कि समुद्री प्रवर्तन अभियानों में उच्चतम स्तर का सहयोग देखा गया है, जिसमें अधिकांश जहाज अमेरिकी सेना के निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहे हैं। इस बड़े पैमाने के ऑपरेशन का विवरण देते हुए सेंटकॉम ने बताया कि इसमें 10,000 से अधिक अमेरिकी सैन्यकर्मी शामिल हैं, जिन्हें 17 युद्धपोतों और 100 से अधिक विमानों का समर्थन प्राप्त है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि वाशिंगटन समुद्र में तेहरान पर दबाव बनाने के लिए किस हद तक सक्रिय है।
वाशिंगटन की इस भारी नौसैनिक उपस्थिति ने खाड़ी में तनाव और अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। महज एक दिन पहले, ईरानी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी की और उनमें से दो को जब्त कर लिया। घेराबंदी शुरू होने के बाद से यह सबसे गंभीर घटनाओं में से एक मानी जा रही है, जो अनिश्चित काल के लिए बढ़ाये गये युद्धविराम की स्थिरता का परीक्षण कर रही है।
वाशिंगटन में ट्रंप प्रशासन ने इस मुद्दे पर दोहरा रुख अपनाया है। एक ओर तेहरान पर स्पष्ट राजनयिक जुड़ाव के लिए दबाव डाला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सैन्य दबाव भी बरकरार रखा गया है। ईरान ने हालांकि सैन्य खतरों के 'साये' में बातचीत करने से इनकार कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस निरंतर घेराबंदी का उद्देश्य तेहरान को दीर्घकालिक समझौते की वार्ताओं के दौरान अधिक एकीकृत और सीधा जवाब देने के लिए मजबूर करना है।
इस मामले पर व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि वर्तमान युद्धविराम के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं है और इसे अनिश्चित काल के लिए बढ़ाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के पूरे भंडार को छोड़ना होगा। एक ऐसी मांग जिसका तेहरान लगातार विरोध करता रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा है कि जब तक ईरान कोई औपचारिक प्रस्ताव पेश नहीं करता और बातचीत किसी ठोस परिणाम की ओर नहीं बढ़ती, तब तक यह घेराबंदी लागू रहेगी।
दूसरी ओर, तेहरान ने वाशिंगटन की कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस घेराबंदी को 'युद्ध की कार्रवाई' और युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान इस प्रकार के जबरन दबाव का कड़ा जवाब देगा। फिलहाल, यह युद्धविराम और स्थिति पूरी तरह से शर्तों पर टिकी हुई है।
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