तेहरान , मई 24 -- युद्ध समाप्त करने, अमेरिकी समुद्री आक्रामकता रोकने तथा ईरान की अवरुद्ध संपत्तियों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अमेरिका 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता श्री बघाई ने शनिवार को टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि हाल के सप्ताहों में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में ईरान पहुंचे पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की दिनभर की यात्रा का उल्लेख करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, "हम अब इस समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने के चरण में हैं। इस स्तर पर चर्चा के मुख्य विषय युद्ध समाप्त करना, अमेरिकी नौसैनिक आक्रामकता रोकना तथा ईरान की अवरुद्ध संपत्तियों की रिहाई से जुड़े मुद्दे हैं।"श्री बघाई ने कहा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच संदेशों के आदान-प्रदान को जारी रखना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान का ध्यान केवल अमेरिका-इजरायल द्वारा थोपे गए युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित है, जो इस्लामी गणराज्य के 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित है और जिस पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। यह पूछे जाने पर कि हालिया बैठकों के बाद ईरान और अमेरिका किसी समझौते के करीब आए हैं या नहीं, श्री बघाई ने कहा कि ईरान को अब भी इस बात का पूरा भरोसा नहीं है कि अमेरिका का रुख फिर से नहीं बदलेगा, जैसा पहले होता रहा है।
उन्होंने माना कि कई सप्ताह की बातचीत के बाद "प्रक्रिया विचारों की सहमति की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है।" ईरानी वार्ता दल के प्रवक्ता के रूप में भी कार्य कर रहे श्री बघाई ने कहा कि "करीब आने" का अर्थ यह नहीं है कि दोनों पक्ष तुरंत किसी समझौते पर पहुंच गए हैं, बल्कि इसका आशय है कि "कुछ मानकों के आधार पर दोनों पक्ष ऐसी स्थिति तक पहुंच सकते हैं जो दोनों के लिए लाभकारी हो।"उन्होंने वार्ता की रूपरेखा बताते हुए कहा, "हमारा दृष्टिकोण पहले 14 अनुच्छेदों वाले समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार करना है। इसमें युद्ध समाप्त करने और हमारे लिए मूलभूत महत्व के मुद्दे शामिल होंगे।"उन्होंने कहा कि इसके बाद 30 से 60 दिनों की उचित समयसीमा में दोनों पक्ष इन मुद्दों के विवरण पर चर्चा करेंगे और अंततः अंतिम समझौते तक पहुंचेंगे।
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