वाशिंगटन/तेहरान , अप्रैल 21 -- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के एक और दौर की तैयारी के बीच 'होर्मुज जलडमरूमध्य' का मुद्दा एक बड़ी बाधा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनसुलझे विवाद के कारण बातचीत शुरू होने से पहले ही पटरी से उतर सकती है।
यह संकीर्ण जलमार्ग 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से एक 'बाधा' बन गया है। सुरक्षित मार्ग को लेकर अनिश्चितता के कारण हजारों नाविक इस जलमार्ग के दोनों ओर फंसे हुए हैं।
एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध से पहले इस जलडमरूमध्य से रोजाना 100 से अधिक जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या काफी गिर गई है। पिछले शुक्रवार से रविवार के बीच केवल 36 जहाज ही यहां से गुजर पाए। हालांकि, यह पिछले हफ्तों की तुलना में थोड़ा बेहतर आंकड़ा है क्योंकि ईरान ने प्रतिबंधों में मामूली ढील दी थी।
शिपिंग एनालिटिक्स फर्म केप्लर ने पुष्टि की है कि 13 अप्रैल को अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी लागू होने के बाद से कम से कम 27 ईरानी जहाज इस चैनल से गुजरे हैं। वहीं, इसी अवधि के दौरान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कई जहाजों को अपना रास्ता बदलने का निर्देश दिया है। वर्तमान में ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में टैंकरों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और कई जहाज संचालकों के लिए बिना सुरक्षा गारंटी के यहां से गुजरना जोखिम भरा बना हुआ है।
पूरे विवाद की मुख्य जड़ इस जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ऐतिहासिक रूप से इस मार्ग पर अपना प्रभाव रखता आया है, लेकिन अब वह इस प्रभाव को औपचारिक रूप देने के लिए एक शुल्क प्रणाली शुरू करने का दबाव बना सकता है। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक ऊर्जा प्रवाह पर ईरान का दबदबा काफी बढ़ जाएगा, जिसे अमेरिका के लिए स्वीकार करना बेहद मुश्किल होगा।
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