तेहरान , मई 27 -- ईरान ने कहा है कि उसे प्रस्तावित 'इस्लामाबाद प्रारूप' का मसौदा मिला है, जो वास्तव में अमेरिका-ईरान के बीच तैयार किया जा रहा सहमति पत्र है जिसका इसका उद्देश्य युद्धविराम बढ़ाना, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलना और साथ ही अधिक विवादास्पद मामलों पर चर्चा शुरू करना है।
सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट में यह जाकनारी दी।
रिपोर्ट के अनुसार यह मसौदा एक 'अनौपचारिक प्रारंभिक दस्तावेज' है। इसमें 14 बिंदु शामिल हैं। इन पर अभी बातचीत चल रही है। इस मसौदे में संशोधन की भी गुंजाइश है। प्रस्तावित प्रारूप के तहत अमेरिका के लिए अपने बंदरगाहों और जहाजों की नाकेबंदी हटाना आवश्यक होगा, जबकि ईरान एक महीने के भीतर फारस की खाड़ी, ओमान सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक शिपिंग यातायात को युद्ध-पूर्व स्तर पर चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के प्रतिबंध हटाये जाने के दायरे से सैन्य जहाजों को बाहर रखा जायेगा, जबकि जहाजों के निरीक्षण और सेवा शुल्क लगाने सहित सभी वाणिज्यिक यातायात ओमान के समन्वय से ईरान के अधिकार में रहेंगे।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एजेंसी को बताया, "तटीय देशों के रूप में हमारे और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक निश्चित तंत्र होना चाहिए।"रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मसौदे में क्षेत्र से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने की अमेरिकी प्रतिबद्धता शामिल है, हालांकि इस वापसी का सटीक दायरा फिलहाल अनसुलझा है। इस पर बातचीत चल रही है कि क्या यह प्रावधान केवल वर्तमान युद्ध के दौरान तैनात बलों पर लागू होगा या पश्चिम एशिया में लंबे समय से तैनात अमेरिकी सेना पर भी इसका विस्तार होगा। इस ढांचे के तहत युद्धविराम को शुरुआत में 60 दिनों के लिए बढ़ाया जायेगा। अगर उस समय के भीतर अधिक विवादास्पद मुद्दों पर कोई सीधा समझौता हो जाता है, जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों से राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था शामिल हैं तो इसे एक बाध्यकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्ताव के रूप में शामिल किया जायेगा।
इस खुलासे के बावजूद ईरानी सरकारी मीडिया ने संज्ञान लिया कि यह ढांचा अब भी अधूरा और नाजुक है, साथ ही चेतावनी दी कि दोनों पक्षों के बीच अब भी बड़े मतभेद मौजूद हैं, विशेष रूप से ईरान के संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार और भविष्य की परमाणु गतिविधियों को लेकर।
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