वॉशिंगटन , जून 07 -- ट्रंप प्रशासन कथित तौर पर ईरान की जब्त संपत्तियों का उपयोग उन खाड़ी अरब देशों में ऊर्जा और अन्य अवसंरचनाओं के पुनर्निर्माण के लिए करने की योजना बना रहा है, जिन्हें ईरान के जवाबी हमलों में नुकसान पहुंचा था।

यह जानकारी ब्लूमबर्ग और सीबीएस न्यूज की रिपोर्टों में दी गयी है।

सीबीएस न्यूज ने अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की सोच से परिचित एक सूत्र के हवाले से बताया कि वित्त मंत्रालय ईरान द्वारा भविष्य में पहुंचाए जाने वाले किसी भी नुकसान की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए ईरानी संपत्तियों को उपलब्ध कराने के लिए "सभी उपलब्ध कानूनी अधिकारों" का उपयोग करने की योजना बना रहा है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, श्री बेसेंट ने वित्त अधिकारियों को फारस की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों की स्थिति का आकलन करने तथा संघर्ष शुरू होने के बाद हुए नुकसान का विस्तृत अनुमान जुटाने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग यह भी विचार कर रहा है कि ईरान समर्थित समूहों पर लगाये गये आरोपों से जुड़े "पूर्व नुकसान" की भरपाई के लिए भी क्या ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता ईरान की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच की मांग को लेकर ठप पड़ी हुई है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रज़ाई ने शुक्रवार को कहा था कि किसी भी समझौते का भविष्य 24 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियों को मुक्त किये जाने पर निर्भर करता है।

श्री रज़ाई ने सीएनएन से कहा था, "यह हमारा अपना पैसा है, अमेरिका का नहीं।" उन्होंने इस मांग को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए विश्वास की परीक्षा बताया था।

दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने मेहर समाचार एजेंसी से कहा था कि ईरान चाहता है कि अमेरिका के साथ किसी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होते ही कम से कम 12 अरब डॉलर जारी किये जायें, जबकि शेष 12 अरब डॉलर एक या दो महीने के भीतर उपलब्ध कराये जायें।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू किये जाने के बाद दोनों पक्षों ने अधिकांश समय तेल और गैस अवसंरचनाओं को सीधे निशाना बनाने से परहेज किया। मार्च के मध्य में इज़रायल ने दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया था, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र माना जाता है। इस हमले से ईरान के गैस उत्पादन का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ था।

इसके बाद ईरान ने घोषणा की थी कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी करने वाले खाड़ी देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठान "प्रत्यक्ष और वैध लक्ष्य" हैं। इसके परिणामस्वरूप सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को जवाबी हमलों के दौरान नुकसान पहुंचा था। बाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता से अप्रैल में युद्धविराम लागू हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए कुछ ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने का आश्वासन दिया था, हालांकि सार्वजनिक रूप से उसने इस मांग को स्वीकार्य नहीं बताया है।

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