ब्रसेल्स , अगस्त 23 -- यूरोपीय संघ में शामिल छह देशों के वित्त मंत्रियों ने तेल कंपनियों पर पूरे ब्लॉक में 'अतिरिक्त मुनाफे पर कर' लगाने की मांग फिर से उठायी है और कहा है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें और जीवन-यापन की लागत का संकट ऐसा है कि जिसके लिए पूरे ईयू को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तेल कंपनियों का 'अत्यधिक मुनाफा' कीमतों में उस बढ़ोतरी से जुड़ा है जो ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण हुई है।
जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया, पोलैंड और पुर्तगाल के वित्त मंत्रियों के साथ-साथ स्पेन के वित्त मंत्री ने आयरलैंड के वित्त मंत्री को एक संयुक्त पत्र भेजा है। गौरतलब है कि आयरलैंड के पास अभी ईयू परिषद की रोटेटिंग प्रेसिडेंसी (बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता) है। मंत्रियों ने आग्रह किया कि डबलिन में होने वाली वित्त प्रमुखों की अगली बैठक के एजेंडे में पूरे ईयू में लेवी लगाने का मुद्दा शामिल किया जाए।
मंत्रियों ने कहा, "हम दशकों में सबसे बड़े आपूर्ति में भारी व्यवधान का सामना कर रहे हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा की बढ़ती लागत से जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
मंत्रियों ने कहा कि तेल कंपनियों को जबरदस्त मुनाफे और रिफाइनरी मार्जिन से फायदा हो रहा है, जो कच्चे तेल की कीमतों की तुलना में तेजी से बढ़े हैं। उन्होंने तर्क दिया कि परिवारों और व्यवसायों के लिए ऊर्जा की कीमतों को स्थायी रूप से कम करने या स्थिर करने के लिए सरकार के मौजूदा उपाय काफी नहीं रहे हैं।
इस समूह ने 'अतिरिक्त मुनाफे पर टैक्स लगाने के लिए पूरे ईयू में एक ढांचे' बनाने की मांग की। इसके लिए उन्होंने 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद ऊर्जा की कीमतें बढ़ने पर लागू किए गए अस्थायी उपाय का उदाहरण दिया।
इस तरह की व्यवस्था के तहत कंपनियों को ऐसे मुनाफे पर अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है जिसे बाहरी बाजार की स्थितियों के कारण असामान्य रूप से अधिक माना जाता है, न कि बेहतर दक्षता या निवेश के कारण।
वित्त मंत्रियों ने कहा कि 2022 के 'विंडफॉल टैक्स' (अचानक हुए भारी मुनाफे पर लगने वाला कर ) से मिले अनुभवों का इस्तेमाल बहुराष्ट्रीय तेल कंपनियों द्वारा विदेशों में कमाए गए मुनाफे पर कर लगाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
'युरोन्यूज' के अनुसार उन्होंने कहा कि इससे कंपनियों को राष्ट्रीय स्तर पर लगने वाले कर से बचने के लिए अलग-अलग देशों के बीच अपनी कमाई को इधर-उधर करने से रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यूरोपीय आयोग से रिफाइनरी मार्जिन पर अपना अध्ययन जल्द से जल्द प्रकाशित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि क्या रिफाइनरियां उपभोक्ताओं और व्यवसायों की कीमत पर ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का फायदा उठा रही हैं।
गौरतलब है कि यह नयी मांग ऐसे समय में उठी है जब ईंधन की ऊंची कीमतें यूरोपीय परिवारों और व्यवसायों पर दबाव डाल रही हैं, जबकि बड़ी तेल कंपनियों ने भारी कमाई की रिपोर्ट दी है।
ऑक्सफैम के अनुसार अप्रैल और जून के बीच बीपी, शेवरॉन, ईएनआई, एक्सॉनमोबिल, शेल और टोटलएनर्जीज का कुल मुनाफा लगभग 40 अरब यूरो (46.6 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया। संस्था का अनुमान है कि पूरे साल का कुल मुनाफा लगभग 147 बिलियन यूरो (171.2 बिलियन डॉलर) होगा और उसने निवेश पर 10 प्रतिशत से अधिक रिटर्न वाले मुनाफे पर कम से कम 50 प्रतिशत का स्थायी अतिरिक्त मुनाफे पर कर लगाने की वकालत की है।
खबरों के अनुसार जर्मनी के वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबील ने इस मुद्दे को 18-19 सितंबर को डबलिन में होने वाली ईयू के वित्त मंत्रियों की बैठक के एजेंडे में शामिल करने की कोशिशों का समर्थन किया है। पुर्तगाल ने भी जुलाई के आखिर में 'अतिरिक्त मुनाफे पर कर' का एक मसौदा पेश किया था, जिसका मकसद ईंधन की अधिक कीमतों से प्रभावित परिवारों और आर्थिक क्षेत्रों की मदद करना है।
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