जयपुर , सितंबर 24 -- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए निर्धारित वैधानिक वेतन सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रति महीना कर दिया गया है।

ईपीएफओ के अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त एवं प्रभारी राजस्थान अजीत कुमार ने बताया कि संशोधित वेतन सीमा गत 17 सितम्बर से प्रभावी हो गई है। श्री कुमार ने बताया कि इस निर्णय से 15 हजार से अधिक और 25 हजार तक वेतन प्राप्त करने वाले ऐसे पात्र कर्मचारी, जो केवल वेतन सीमा के कारण अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर रह जाते थे, अब सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे।

उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों को इससे पहली बार ईपीएफओ कवरेज मिलने की उम्मीद है। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को ईपीएफ बचत,ईपीएस के तहत पेंशन तथा ईडीएलआई के तहत बीमा सुरक्षा का लाभ मिलेगा। नियोक्ताओं से संशोधित वेतन सीमा के अनुरूप अनुपालन सुनिश्चित करने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ईसीआर दाखिल करने का आग्रह किया गया है।

उन्होंने कहा कि ईपीएफओ का उद्देश्य श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ बेहतर सेवा वितरण, डिजिटल प्रशासन तथा औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना है।

श्री कुमार ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) के तहत राजस्थान की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान में 26 हजार 694 संस्थान पीएमवीबीआरवाई के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। योजना के तहतत 44 हजार से अधिक प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को लाभ प्राप्त हुआ है तथा लगभग 21 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता लाभार्थियों के खातों में जमा की जा चुकी है। एवं 2515 संस्थानों को 53 करोड़ रुपए से अधिक की प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है।

ईपीएफओ द्वारा चलाए जा रहे कर्मचारी नामांकन अभियान -2026 के माध्यम से ऐसे पात्र कर्मचारियों को ईपीएफ के दायरे में लाने का अवसर दिया जा रहा है, जो संस्थानों में कार्यरत होने के बावजूद अब तक भविष्य निधि सदस्य नहीं बन पाए हैं। यह अभियान आगामी 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें एक अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच नियुक्त होकर वर्तमान में सेवा में कार्यरत पात्र कर्मचारी शामिल हैं। ऐसे मामलों में जहां कर्मचारी अंशदान पहले कभी नहीं काटा गया, कर्मचारी अंशदान माफ किए जाने का प्रावधान है। नियोक्ता को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नियोक्ता अंशदान, ब्याज एवं प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा तथा क्षति मात्र 100 रुपए होगी।

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