लुधियाना , सितंबर 17 -- पंजाब में लुधियाना के औद्योगिक क्षेत्र ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किए जाने के प्रस्तावित फैसले पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसकी समीक्षा करने की मांग की है।

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के अध्यक्ष बादिश जिंदल अध्यक्ष ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कहा कि इस कदम से विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और श्रम-प्रधान विनिर्माण इकाइयों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि 15,000 रुपये की सीमा पर नियोक्ता का कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योगदान 1,800 रुपये प्रतिमाह होता है, जबकि 25,000 रुपये की सीमा पर यह 3,000 रुपये हो जाएगा। यानी प्रति कर्मचारी 1,200 रुपये प्रतिमाह या 14,400 रुपये सालाना का अतिरिक्त भार पड़ेगा। 100 कर्मचारियों वाली इकाई पर यह अतिरिक्त वार्षिक बोझ करीब 14.40 लाख रुपये और 500 कर्मचारियों वाली इकाई पर करीब 72 लाख रुपये हो सकता है।

पत्र में कहा गया है कि सरकार के अनुसार इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के दायरे में आ सकते हैं। प्रतिनिधित्व में सामाजिक सुरक्षा विस्तार के उद्देश्य का समर्थन करते हुए कहा गया है कि इसके साथ नियोक्ताओं, खासकर एमएसएमई और श्रम-प्रधान उद्योगों पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्च का भी आकलन किया जाना चाहिए।

उद्योग की ओर से सुझाव दिया गया है कि 15,000 से 25,000 रुपये के अतिरिक्त वेतन हिस्से पर नियोक्ता का योगदान कम रखा जाए, अतिरिक्त योगदान को कई वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए या सरकार द्वारा योगदान के एक हिस्से में सहायता दी जाए। साथ ही ईपीएफ, ईएसआई और अन्य वैधानिक रोजगार लागतों के संयुक्त प्रभाव का व्यापक आकलन करने की मांग की गई है।

पत्र में प्रधानमंत्री से नियोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव की समीक्षा कर ऐसा तंत्र अपनाने का अनुरोध किया गया है, जिससे विस्तारित सामाजिक सुरक्षा का लाभ कर्मचारियों तक पहुंचे और उद्योग की रोजगार सृजन तथा निवेश क्षमता पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

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