रांची , जनवरी 16 -- झारखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की क्रिमिनल रिट याचिका पर आज सुनवाई करते हुए रांची पुलिस की जांच पर पूर्ण रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने यह फैसला ईडी के रांची कार्यालय में कथित मारपीट मामले से जुड़ी कार्रवाई के खिलाफ सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार को सात दिनों के अंदर और निजी प्रतिवादी संतोष कुमार को 10 दिनों के अंदर जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश जारी किया। साथ ही, केंद्रीय गृह सचिव और संतोष कुमार को मामले में पक्षकार बनाया गया।ईडी ने अपनी याचिका में सीबीआई द्वारा जांच कराने की मांग की थी, जिस पर न्यायालय ने विचार करने का स्पष्ट संकेत दिया है।
झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईडी रांची कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी जोर दिया। अब यह जिम्मेदारी रांची एसएसपी की होगी, जबकि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (सीआईएसएफ) को कार्यालय की सुरक्षा सौंपी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ईडी की स्वायत्त जांच प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं डाली जा सकतीज्ञातव्य है कि यह पूरा विवाद झारखंड पेयजल विभाग में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की ईडी जांच से उपजा है। जांच के दायरे में आने वाले आरोपी संतोष कुमार ने बिना किसी समन के ही ईडी के रांची कार्यालय पहुंचकर अपना बयान दर्ज कराने की गुजारिश की। हालांकि, पूछताछ के दौरान उन्होंने ईडी अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए रांची के एयरपोर्ट थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करा दी।
एफआईआर के बाद रांची पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और गुरुवार को ईडी कार्यालय में जाकर कार्रवाई का प्रयास किया। ईडी ने इसे अपनी जांच में हस्तक्षेप बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एजेंसी का कहना है कि राज्य पुलिस का यह कदम केंद्रीय एजेंसी की स्वतंत्रता को कमजोर कर रहा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस की किसी भी आगे की कार्रवाई पर पूर्ण रोक लगा दी, जो ईडी के लिए बड़ी राहत है। यह फैसला झारखंड में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीआई जांच की मांग स्वीकार होने पर मामला और गहरा सकता है। अगली सुनवाई में राज्य और प्रतिवादियों के जवाब के बाद कोर्ट आगे का रुख तय करेगा।
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