नयी दिल्ली , मार्च 20 -- प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने पीएसीएल लिमिटेड और उसकी संबंधित कंपनियों द्वारा संचालित एक सामूहिक निवेश योजना से जुड़ी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी की जांच में पंजाब और दिल्ली में स्थित 5,046.91 करोड़ रुपये मूल्य की 126 अचल संपत्तियों को कुर्क कर दिया है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 420 के अंतर्गत केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने पीएमएलए जांच शुरू की। यह एफआईआर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार दर्ज की गई थी।

इसके बाद, सीबीआई ने एक अवैध निवेश योजना चलाने में भूमिका के लिए व्यक्तियों एवं कंपनियों सहित 33 आरोपियों के खिलाफ एक आरोप पत्र और एक पूरक आरोप पत्र दायर किया।

आरोप पत्रों के अनुसार, आरोपी संस्थाओं एवं व्यक्तियों ने कृषि भूमि की बिक्री एवं विकास के बहाने पूरे भारत में लाखों निवेशकों से धोखाधड़ी करके 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाने के लिए एक विशाल अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाई।

निवेशकों को अग्रिम नकद भुगतान और किश्त योजनाओं के माध्यम से निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया और उनसे भ्रामक दस्तावेज़ों जैसे कि समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए गए। अधिकांश मामलों में ज़मीन कभी सौंपी ही नहीं गई और निवेशकों को लगभग 48,000 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। इस योजना में धोखाधड़ी को छिपाने और अवैध लाभ कमाने के लिए कई फर्जी संस्थाओं और रिवर्स सेल लेनदेन का उपयोग किया गया।

एफआईआर दर्ज होने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने दो फरवरी, 2016 के अपने आदेश में सेबी को निर्देश दिया कि वह पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करे ताकि पीएसीएल द्वारा खरीदी गई भूमि का निपटान किया जा सके और बिक्री से प्राप्त राशि को निवेशकों को वापस किया जा सके।

हालांकि, आगे की जांच में पीएसीएल की संपत्तियों का लगातार अवैध दुरुपयोग का मामला सामने आया जिसके बाद पंजाब सतर्कता ब्यूरो, जवाहर सर्किल पुलिस स्टेशन (जयपुर) और अत्तिबेले पुलिस स्टेशन (बेंगलुरु) द्वारा निवेशकों के धन का उपयोग करके अधिग्रहित भूमि की अवैध बिक्री, अतिक्रमण एवं दुरुपयोग के लिए तीन अतिरिक्त एफआईआर दर्ज की गईं।

इन मामलों में की गई छापेमारी में खाली बिक्री दस्तावेज, हस्ताक्षरित चेक बुक और पहचान दस्तावेजों सहित आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई जो अपराध की आय को व्यवस्थित रूप से निकालने एवं निपटाने के प्रयासों का संकेत देती है।

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