नयी दिल्ली , मार्च 27 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ज्ञानराधा मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (डीएमसीसीएसएल) और अन्य से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और धन-शोधन मामले में 3.46 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है।
ईडी के मुंबई कार्यालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
ईडी अधिकारियों ने बताया कि कुर्क की गई संपत्तियों में खारघर, नवी मुंबई में स्थित कार्यालय यूनिट्स शामिल हैं। यह कुर्की धन-शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत और महाराष्ट्र के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में भारतीय दंड संहिता, 1860 की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज कई प्राथमिकियों के आर पर की गयी है। ये प्राथमिकी सुरेश कुटे और अन्य द्वारा डीएमसीसीएसएल के जरिए किए गए निवेशक धोखाधड़ी के मामले में दर्ज की गई थीं। प्राथमिकियों के अनुसार सोसाइटी ने कई अधिक रिटर्न देने वाली जमा योजनाएं शुरू की थीं, जिनमें 12-14 प्रतिशत तक का रिटर्न देने का वादा किया गया था। इन योजनाओं ने बड़ी संख्या में निवेशकों को आकर्षित किया। जमा राशि का भुगतान न होने या आंशिक भुगतान होने के कारण हालांकि इन योजनाओं से निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
ईडी की जांच में पता चला कि सोसाइटी के धन का एक बड़ा हिस्सा, जो लगभग 2,467 करोड़ रुपये था, 'कर्ज' के रूप में कंपनियों के एक समूह (कुटे ग्रुप) को स्थानांतरित कर दिया गया था। इस समूह का मालिकाना हक या नियंत्रण सुरेश कुटे और श्रीमती अर्चना कुटे के पास था। ये भुगतान बिना किसी उचित दस्तावेज, गिरवी रखी गई संपत्ति या अंतिम उपयोग प्रमाणन के किए गए थे। वैध व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जाने की बजाय इस धन को निजी लाभ के लिए निकाल लिया गया या असंबंधित व्यावसायिक उपक्रमों में निवेश कर दिया गया।
ईडी ने अब तक इस मामले में कई तलाशी अभियान चलाए हैं और कई अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए हैं। जब्त, फ्रीज या कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य अब लगभग 1,625.36 करोड़ रुपये हो गया है।
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