नयी दिल्ली , मार्च 31 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने त्रिपुरा में नशीले एवं साइकोट्रोपिक पदार्थों की तस्करी और अवैध व्यापार के खिलाफ 14 आरोपियों के खिलाफ तीन अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं।
ईडी की अगरतला उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने यह जानकारी दी।
ईडी के अधिकारियों ने बताया कि ये शिकायतें एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज अपराधों से जुड़ी हैं और इनका संबंध व्यवस्थित ड्रग तस्करी गतिविधियों से की गयी 'अपराध की कमाई' के शोधन से है। इनमें पहली शिकायत लिटन साहा और उसके सहयोगियों के खिलाफ दायर की गयी है। ईडी ने इस जांच की शुरुआत त्रिपुरा पुलिस (जिरानिया थाना) में इनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की है। इस मामले में त्रिपुरा पुलिस पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।
जांच से पता चला कि लिटन साहा कोडीन-आधारित कफ सिरप की अवैध तस्करी में शामिल था। इसमें त्रिपुरा पुलिस की जब्त की गयी 9,590 बोतलें भी शामिल हैं, जिन्हें उसकी लॉजिस्टिक फर्म 'मेसर्स स्वस्तिक रोडवेज' के माध्यम से ले जाया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि उसने परिवहन व्यवसाय की आड़ में विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से अपराध की कमाई को घुमाया था।
उन्होंने बताया कि दूसरी शिकायत देबब्रत डे और उसके सहयोगियों के खिलाफ दाखिल की गयी है। ईडी ने यह जांच त्रिपुरा पुलिस की दर्ज दो प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। इनमें से एक मामला 1,352 किलोग्राम सूखे गांजे/कैनबिस की जब्ती से संबंधित है। दूसरा मामला 'फेंसिडिल' कफ लिन्क्टस की 14,400 बोतलों की जब्ती से जुड़ा है। इन मामलों में त्रिपुरा के धर्मनगर और खोवाई की विशेष अदालतों में आरोप पत्र दाखिल किये गये थे।
जांच से पता चला है कि देबब्रत डे और अपू रंजन दास आदतन ड्रग तस्कर हैं, जो अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क चलाते थे। यह नेटवर्क त्रिपुरा से बिहार और अन्य राज्यों में गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। इस साजिश में शामिल उनका सहयोगी सेवारत पुलिस अधिकारी ध्रुव मजूमदार है। उसने अपनी पत्नी के नाम पर पंजीकृत अचल संपत्तियों में अवैध कमायी का निवेश किया था। ईडी ने आरोपियों की ऐसी कई संपत्तियां कुर्क की हैं, जो आपराधिक गतिविधियों के जरिये अर्जित की गयी थीं।
तीसरी शिकायत विशु कुमार त्रिपुरा और अन्य के खिलाफ दाखिल की गयी है। ईडी ने इस जांच की शुरुआत त्रिपुरा पुलिस के 243 किलोग्राम सूखा गांजा जब्त करने के संबंध में दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर की थी। इस मामले में त्रिपुरा के सिपाहीजाला स्थित विशालगढ़ की विशेष अदालत (एनडीपीएस) में आरोप पत्र दाखिल किये गये हैं। जांच में सामने आया है कि विशु कुमार त्रिपुरा मुख्य आरोपी है और वह कामिनी देबबर्मा के साथ मिलकर 2015 से बड़े पैमाने पर अंतर-राज्यीय गांजा तस्करी नेटवर्क का मुख्य संचालक रहा है। दोनों आरोपियों ने ड्रग तस्करी में अपनी संलिप्तता और अवैध कारोबार में अपनी साझेदारी स्वीकार कर ली है।
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