नयी दिल्ली , मार्च 31 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आइजोल सब-जोनल ऑफिस ने मंगलवार को कहा कि उसने रवि गुलगुलिया और अन्य लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया है। यह मामला सरकारी सब्सिडी के फर्जी दावे से संबंधित है।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की थी, जो मिजोरम पुलिस के एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), आइजोल द्वारा भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर पर आधारित है। मिजोरम पुलिस ने पहले वर्ष 2019 में ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
पीएमएलए के तहत जांच में पता चला कि रवि गुलगुलिया ने डॉ. मार्गरेट एम. वार्टे के साथ आपराधिक साजिश रचकर आइजोल के पास मिजो कार्बन प्रोडक्ट्स (एमसीपी) नाम से कोक उत्पादन यूनिट स्थापित की। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की सब्सिडी को फर्जी तरीके से हासिल करना था।
जांच से यह भी साबित हुआ कि दावा किए गए समय में यूनिट में कामकाज बिल्कुल नहीं हो रहा था। आरोपी ने फर्जी और जाली दस्तावेज तैयार किए, जिसमें उत्पादन के झूठे रिकॉर्ड, माल परिवहन, कच्चे माल की खरीद और डीजल खपत के बनावटी रिकॉर्ड शामिल थे। इनके आधार पर उन्होंने केंद्रीय परिवहन सब्सिडी (सीटीएस) के रूप में 2.47 करोड़ और केंद्रीय पूंजी निवेश सब्सिडी (सीसीआईएस) के रूप में 93.90 लाख का फर्जी दावा किया। इस घोटाले से कुल 3.41 करोड़ की अवैध आय हुई।
ईडी की जांच में आगे पता चला कि सब्सिडी की राशि मिलते ही अपराध की आय को व्यवस्थित तरीके से कई संस्थाओं और बैंक खातों के जरिए इधर से उधर किया गया।
इनमें शामिल कंपनियों में रवि गुलगुलिया एंड संस (एचयूएफ), मेसर्स शिवरात्रि कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स थर्डवेव सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स गुलगुलिया ट्रेड कॉर्पोरेशन और मेसर्स यश मार्केटिंग इंडिया है।
ये फंड सर्कुलर ट्रांजेक्शन के जरिए कई हिस्सों में बांटे गए और अंत में मुख्य आरोपी के व्यक्तिगत खातों तथा रवि गुलगुलिया द्वारा नियंत्रित पार्टनरशिप फर्म मेसर्स ग्लोबल एंट्रेड में समाहित कर दिए गए। इस फर्म को 45 लाख प्राप्त हुए।
इस मामले में ईडी ने पहले ही पीएमएलए की धारा 5 के तहत 38.40 लाख मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।
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