दरभंगा , मई 15 -- जाने माने पर्यावरणविद् एवं स्नातकोत्तर भूगोल विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार सिंह ने शुक्रवार को कहा कि ईको एंजायटी, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, वनों की कटाई और जैव विविधता के विनाश के कारण उत्पन्न होने वाली गहरी मानसिक चिंता है।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में "पर्यावरणीय चिंता और भूगोल" विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि विश्व में बढ़ते प्रदूषण और जलवायु असंतुलन के कारण लोग अपने तथा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर भय और असुरक्षा महसूस कर रहे हैं।जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बढ़ रही "ईको एंजायटी" अर्थात पर्यावरणीय चिंता को गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन गयी है।

डॉ. एम आर शर्मा ने बिहार की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दरभंगा, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और मुजफ्फरपुर जैसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हर वर्ष आने वाली बाढ़, नदी कटाव, अनियमित मानसून और बढ़ती गर्मी लोगों में मानसिक तनाव बढ़ा रही है। किसानों एवं ग्रामीण परिवारों में फसल नुकसान, कर्ज और पलायन की चिंता लगातार बनी रहती है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है।

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