रायपुर , जुलाई 28 -- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में वर्ष 2006-07 और 2007-08 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत, कांकेर में तत्कालीन जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित आठ अधिकारियों के खिलाफ लगभग छह हजार पन्नों का चालान प्रस्तुत किया है।

ईओडब्ल्यू से मंगलवार को मिली जानकारी के अनुसार, जांच में आठ ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत सामग्री खरीद के दौरान एक करोड़ 69 लाख 14 हजार 247 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध अदालत में अभियोजन चालान पेश किया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ केपी देवांगन ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना जिला स्तर पर सामग्री की केंद्रीकृत खरीदी कराई, जबकि नियमों के अनुसार सामग्री खरीदने का अधिकार संबंधित जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों को प्राप्त था।

जांच में यह भी पाया गया कि फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल सत्यापन पत्रक, रोजगार गारंटी योजना की गाइडलाइन, रोजगार उपलब्धता रजिस्टर, फाइल कवर, मस्टर रोल पत्रक तथा श्रमिक जानकारी पत्रक सहित विभिन्न सामग्रियों की खरीदी निर्धारित निविदा एवं शासकीय प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई।

चालान में श्री देवांगन के अलावा तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ राधाकांत कर (कांकेर), गोवर्धन गजबल्ला (नरहरपुर), परदेशी राम मरकाम (चारामा), भारत राम नेताम (अंतागढ़), रामकिशुन ध्रुव (कोयलीबेड़ा), जीआर ठाकुर (भानुप्रतापपुर) तथा संवालदास बघेल (दुर्गकोंदल) को आरोपी बनाया गया है।

ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार सभी आरोपियों ने कथित रूप से आपसी मिलीभगत से निविदा और शासकीय खरीद संबंधी नियमों की अनदेखी की तथा पद का दुरुपयोग कर सरकारी राशि के अनियमित उपयोग को अंजाम दिया।

मामले में आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-B, 409 और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(C), 13(1)(D) और 13(2) के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की गई है।

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