श्रीगंगानगर , जून 26 -- राजस्थान में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) का उद्देश्य श्रमिकों एवं उनके परिवारों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान में निजी अस्पतालों में रेफरल एवं चिकित्सा दावों की प्रक्रिया इतनी जटिल होती जा रही है कि आम श्रमिक, अनपढ़ मजदूर और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए इसका पालन करना अत्यंत कठिन हो गया है।

सूत्रों ने बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों में प्रदर्शित सूचनाओं के अनुसार रेफरल, ओपीडी बिल, आईपीडी बिल और आपातकालीन भर्ती के दावों के लिए कई प्रकार के दस्तावेजों की मांग की जाती है। इनमें रेफरल पर्ची, डिस्चार्ज समरी, जांच रिपोर्ट, एनएसी, चिकित्सकों के हस्ताक्षर एवं मोहरयुक्त प्रमाण पत्र, दवाओं के मूल बिल, बैंक पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटोकॉपी और अन्य कई दस्तावेज शामिल हैं।

सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि गंभीर बीमारी से जूझ रहा मरीज या उसका परिवार पहले से ही मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक संकट का सामना कर रहा होता है। ऐसे समय में उनसे इतनी अधिक कागजी औपचारिकताओं की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से अनपढ़, ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के श्रमिकों के लिए यह प्रक्रिया और अधिक कठिन हो जाती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक साधारण मजदूर, जो बीमारी से परेशान है, विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाकर, फोटोकॉपी करवाकर, प्रमाणित प्रतियां जुटाकर और हर दस्तावेज पर आवश्यक हस्ताक्षर एवं मोहर लगवाकर समय पर उपचार प्राप्त कर सकता है। किसी दस्तावेज में छोटी सी कमी रह जाए तो मरीज के दावे अथवा रेफरल में बाधा उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है।

कर्मचारियों ने बताया कि ईएसआईसी की स्थापना सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए की गयी थी। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि रेफरल एवं दावा प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं मरीज हितैषी बनाया जाए। डिजिटल सत्यापन, एकल खिड़की व्यवस्था हेल्प डेस्क सुविधा और पहले उपचार, बाद में औपचारिकता जैसे सिद्धांतों को लागू किया जाना चाहिए, विशेषकर गंभीर एवं आपातकालीन मामलों में।

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