भुवनेश्वर , मई 19 -- ओडिशा उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक तेल किल्लत के बीच ईंधन संरक्षण का प्रतीकात्मक संदेश देते हुए आधिकारिक वाहनों के बजाय साइकिल से उच्च न्यायालय पहुंचकर सादगी और ऊर्जा बचत का संदेश दिया।

न्यायमूर्ति सावित्री राठो, न्यायमूर्ति वी. नरसिंह और न्यायमूर्ति सिबो शंकर मिश्रा सोमवार को कटक स्थित न्यायिक अकादमी परिसर से उच्च न्यायालय तक साइकिल से पहुंचे। उन्होंने मौजूदा ऊर्जा अनिश्चितता के दौरान मितव्ययिता और ईंधन बचत की आवश्यकता को रेखांकित किया।

इस बीच, उच्च न्यायालय ने घोषणा की कि ग्रीष्मकालीन अवकाश-2026 के दौरान सभी अवकाशकालीन पीठें वर्चुअल माध्यम से कार्य करेंगी, ताकि अनावश्यक आवागमन को कम किया जा सके और न्यायालय का कार्य सुचारु रूप से चलता रहे।

उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने सोमवार को जारी एक अधिसूचना में सभी अधीक्षकों को कर्मचारियों के लिए उपयुक्त रोस्टर व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है, जिससे न्यायालय और रजिस्ट्री के निर्बाध संचालन के लिए कम-से-कम 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यालयों में शारीरिक रूप से उपस्थित रहें।अधिसूचना में कहा गया है कि रोस्टर व्यवस्था के तहत जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यालय में उपस्थिति आवश्यक नहीं होगी, उन्हें कार्यालय समय के दौरान टेलीफोन, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर उपलब्ध रहना होगा। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश भी दिये जा सकते हैं।

उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी शाखा या अनुभाग के कार्य की अनिवार्यता को देखते हुए कोई अधीक्षक मौजूदा रोस्टर व्यवस्था को अपर्याप्त पाता है, तो संशोधित रोस्टर स्वीकृति के लिए रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।

संबंधित सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सरकारी कार्यों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाये और किसी प्रकार की देरी न हो।अधिसूचना में यह भी सलाह दी गयी है कि जहां तक संभव हो, आधिकारिक बैठकों का आयोजन वर्चुअल अथवा ऑनलाइन माध्यम से किया जाये, जबकि अत्यावश्यक और अपरिहार्य परिस्थितियों में ही भौतिक बैठकें आयोजित की जायें।

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