देहरादून , फरवरी 20 -- उत्तराखंड में देहरादून स्थित लोक भवन में हर वर्ष होने वाला वसंत उत्सव इस वर्ष आगामी 27 फरवरी से शुरू होगा और इसकी थीम "फ्लोरल हीलिंग: नेचर्स पाथ टू वेल बीइंग" पर केंद्रित होगी। यह जानकारी शुक्रवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) गुरमीत सिंह ने 'कर्टेन रेजर' में दी।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष विशेष पोस्टल कवर के लिए ''भोजपत्र'' का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि 27 फरवरी को दोपहर 1.00 बजे से सायं 6.00 बजे तक तथा 28 फरवरी एवं 01 मार्च को प्रातः 09.00 बजे से सायं 6.00 बजे तक वसंतोत्सव और पुष्प प्रदर्शनी जन सामान्य के लिए निःशुल्क खुली रहेगी।
राज्यपाल ने कहा कि लोक भवन में आयोजित होने वाला वसंतोत्सव पिछले कुछ वर्षों में राज्य की सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यह उत्सव प्रकृति, परंपरा और प्रगति के संगम का प्रतीक है तथा आमजन, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। उन्होंने बताया कि वसंतोत्सव स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और कृषि आधारित उत्पादों को एक सशक्त मंच प्रदान करता है। इस आयोजन के माध्यम से कारीगरों, किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन का अवसर मिलता है, जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
श्री सिंह ने कहा कि राज्य में पुष्प उत्पादन के बढ़ते क्षेत्रफल और अनुकूल जलवायु के कारण फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं। पुष्प प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धित उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रहे हैं, वहीं ऐसे आयोजन पुष्प पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर स्थानीय पर्यटन और रोजगार के अवसरों का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पुष्पों का विशेष स्थान है और वसंत ऋतु सृजन एवं नव प्रेरणा का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि पुष्प, कृषि पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को बल दे रही है।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक रूप से पुष्प श्रद्धा, पवित्रता और कृतज्ञता के प्रतीक भी हैं। 'कर्टेन रेजर' में सचिव कृषि एवं कृषक कल्याण एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव राज्यपाल रीना जोशी, निदेशक उद्यान एसएल सेमवाल, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. रतन कुमार भी उपस्थित रहे।
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