इस्लामाबाद , अप्रैल 11 -- अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में जारी महत्वपूर्ण वार्ता के बीच ईरान ने कहा है कि वह संघर्ष विराम की प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करने के लिए लेबनान के साथ सक्रिय रूप से संपर्क बनाए हुए है।

'इस्लामाबाद वार्ता' के नाम से जानी जाने वाली यह चर्चा शनिवार को शुरू हुई, और इसका उद्देश्य उस नाजुक संघर्ष विराम को स्थायी बनाना है जिसने हाल ही में 40 दिनों के विनाशकारी युद्ध को रोका था।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रणनीतिक मध्यस्थ माने जाने वाले संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालबाफ कर रहे हैं। इसमें विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी शामिल हैं। वार्ता की जटिलता और संवेदनशीलता को देखते हुए ईरान ने 71 सदस्यीय विशाल दल भेजा है, जिसमें वार्ताकार, तकनीकी विशेषज्ञ और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर भी मौजूद हैं।

हिजबुल्लाह के करीबी सूत्रों ने पाकिस्तान में हो रही इस वार्ता का समर्थन किया है। पाकिस्तान में ईरान के दूत रज़ा अमिरी मोघदाम ने वार्ता की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ईरानी राष्ट्र के खिलाफ एक अवैध युद्ध को समाप्त करना है। हालांकि, उन्होंने इस प्रक्रिया के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह देखना अभी बाकी है कि क्या अमेरिका मेजबान देश (पाकिस्तान) के मध्यस्थता प्रयासों का सम्मान करता है।

इसी बीच, इजरायली और लेबनानी प्रतिनिधियों के मंगलवार को वाशिंगटन में मिलने की संभावना है। इजरायल ने घोषणा की है कि वह अगले सप्ताह वाशिंगटन में लेबनान के साथ औपचारिक शांति वार्ता करेगा, लेकिन उसने हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष विराम पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है। इजरायली राजदूत येचिएल लीटर ने स्पष्ट किया कि ये वार्ता लेबनानी सरकार के साथ होगी, न कि हिजबुल्लाह के साथ।

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