चेन्नई , अप्रैल 02 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पहले सौर मिशन आदित्य-एल1 के माध्यम से सूर्य के अवलोकन (ऑब्जर्वेशन) के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं।

आदित्य-एल1 मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बड़ा मील का पत्थर है, जो सूर्य और पृथ्वी के बीच स्थित एल1 बिंदु से सूर्य को निरंतर देखने और उसकी निगरानी करने की सुविधा प्रदान करता है। यह दूसरा अवसर है जब एजेंसी ने वैज्ञानिकों और भौतिकी विज्ञान के सदस्यों से इस तरह का प्रस्ताव आमंत्रित किया है।

इसरो ने गुरुवार को एक अद्यतन जानकारी में कहा कि मिशन से प्राप्त सूचना को वैश्विक वैज्ञानिक उपयोग के लिए नियमित रूप से सार्वजनिक तौर पर जारी किया जाता है। एजेंसी ने बताया कि सार्वजनिक डोमेन में पहले ही 27 टीबी से अधिक डेटा उपलब्ध है और अंतरराष्ट्रीय सह-समीक्षित पत्रिकाओं (पीयर रिव्यूड जर्नल्स) में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिणाम प्रकाशित किये जा चुके हैं।

एजेंसी ने कहा कि इस अनूठे मिशन से वैज्ञानिक लाभ को और अधिक बढ़ाने के लिए यह प्रस्ताव आमंत्रित किया गया है। शोधकर्ताओं से आमंत्रण के विवरण को ध्यान से पढ़ने और ऐसे प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आह्वान किया गया है, जो सौर विज्ञान की समझ को बढ़ाने में मदद करते हों।

उल्लेखनीय है कि सूर्य के व्यापक अध्ययन के लिए समर्पित उपग्रह आदित्य-एल1 को दो सितंबर को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया था। इसमें सात अलग-अलग पेलोड हैं, जो सूर्य से संबंधित विविध अध्ययनों के लिए बनाए गये हैं।

आदित्य-एल1 पृथ्वी की कक्षा से 19 सितंबर, 2023 को लैग्रेंज-1 (एल1) बिंदु की चार महीने लंबी यात्रा की शुरुआत थी। लगभग 110 दिनों के बाद इसे एल1 के चारों ओर एक कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया था।

यह लगातार पांचवीं बार था, जब इसरो ने किसी वस्तु को सफलतापूर्वक दूसरे खगोलीय पिंड या अंतरिक्ष में दूरस्थ स्थान पर स्थापित किया था।

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