चेन्नई , जनवरी 10 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को कहा कि पहले सूर्य अन्वेषण मिशन के हिस्से के रूप में भेजे गये आदित्य-एल1 उपग्रह ने पृथ्वी की अदृश्य चुंबकीय ढाल पर एक शक्तिशाली सौर तूफान के प्रभाव का विश्लेषण किया है।

इसरो ने कहा कि अंतरिक्ष मौसम का मतलब है सूरज पर कुछ समय की गतिविधियों जैसे सौर प्लाज्मा विस्फोटों की वजह से उत्पन्न होने वाली स्थितियां, जो धरती पर उपग्रहों, संचार और नेविगेशन सेवाओं और पृथ्वी पर पावर ग्रिड बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं।

ऐसे शक्तिशाली अंतरिक्ष मौसम घटनाओं के दौरान पृथ्वी की चुंबकीय ढाल काफी हद तक प्रभावित हो सकती है। इसरो के वैज्ञानिकों और शोध छात्रों ने अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों के डेटा के साथ आदित्य-एल1 मिशन के अवलोकन का उपयोग कर एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया है। इसे एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (दिसंबर 2025) में प्रकाशित किया गया, जिसमें अक्टूबर 2024 के दौरान पृथ्वी पर प्रभाव डालने वाले एक शक्तिशाली सौर तूफान की जांच की गयी थी।

यह तूफान सूर्य से सौर प्लाज्मा मटीरियल के बड़े विस्फोट की वजह से आया था। अध्ययन में यह पता चला कि सबसे गंभीर प्रभाव सौर तूफान के अशांत क्षेत्र के प्रभाव के दौरान हुआ। आदित्य-एल1 के अवलोकनों की मदद से इसकी पहचान की गयी थी। इस अशांत क्षेत्र ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को बहुत ज्यादा दबा दिया, जिससे असामान्य रूप से वह पृथ्वी के बहुत करीब आ गया और भूस्थैतिक कक्षा में कुछ उपग्रह कुछ समय के लिए मुश्किल अंतरिक्ष हालात में आ गये।

इस घटना का अनुभव केवल गंभीर अंतरिक्ष मौसम घटनाओं के दौरान होता है। तूफान के अशांत चरण के दौरान ऑरोरल क्षेत्र (उच्च अक्षांश क्षेत्रों) में धाराएं बेहद तेज हो जाती हैं, जो संभावित रूप से पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को गर्म कर सकती हैं और वायुमंडलीय पलायन को बढ़ा सकती हैं। इस अध्ययन के निष्कर्ष अंतरिक्ष मौसम की घटनाओं की समझ और उनके रीयल-टाइम आकलन की और अधिक अहमियत दिखाते हैं, ताकि महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा की जा सके।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित