जयपुर , मई 01 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इलेक्ट्रोपैथ को प्रकृति से जुड़ी चिकित्सा पद्धति बताते हुए कहा है कि इसे प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षण की व्यवस्था किया जाना आवश्यक है।

श्री देवनानी शुक्रवार को यहां गांधी नगर स्थित एम-8 में राजस्थान इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति बोर्ड के बनाए गए कार्यालय और प्रशासनिक परिसर का उद्घाटन करने के बाद आयोजित समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि साथ ही नियमित अनुसंधान करें और उनका मानकीकरण कराएं। उन्होंने कहा कि इससे इस चिकित्सा पद्धति की गुणवत्ता, सुरक्षा, दक्षता और निरंतरता बढ़ेगी।

उन्होंने इस चिकित्सा पद्धति को राज्य में शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि इस प्रशासनिक निर्णय से भारतीय चिकित्सा में नये आयाम जुड़ेंगे।

श्री देवनानी ने इस मौके पर बोर्ड के इलेक्ट्रोपैथी न्यूज लेटर के तृतीय संस्करण और आरोग्य मेला पुस्तिका का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि एलोपैथी, आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक, इलेक्ट्रोपैथी आदि चिकित्सा पद्धतियां भारतीय ऋषियों के हजारों वर्ष पहले के जान और शोध पर आधारित है। उन्होंने कहा कि गणेशजी की सूंड भारत में बहुत पहले से ही शल्य चिकित्सा मौजूद होने का प्रमाण है।

श्री देवनानी ने कहा कि चिकित्सा की प्रत्येक पद्धति में भारत विश्व गुरु है। विश्व का मार्ग दर्शक है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति के पहलुओं की जानकारी नई पीढ़ी को बताएं। वैकल्पिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का प्रकृति के साथ सामंजस्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने योग को विश्व में विस्तारित किया है। उसी का परिणाम है कि आज के युवा सुबह-सुबह उद्यानों में स्वप्रेरणा से योग करके अपने मन, मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ बना रहे है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र तब ही बनेगा जब हम सभी अपने शरीर को स्वस्थ रखने का संकल्प लेंगे। इसी से राष्ट्र प्रथम का भाव भी जगेगा। उन्होंने इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा से जुड़े लोगों का आह्वान किया कि वे स्कूलों, कॉलेजों में जाकर दिनचर्या और संतुलित आहार की जानकारी देंगे तो स्वस्थ भारत में सभी भागीदार बन सकेंगे। डॉ. देवनानी ने कहा कि मरीज को ग्राहक ना समझे। उन्होंने कहा कि जब चिकित्सा में व्यवसाय बढ़ता है तो जन विश्वास घटता है।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री एवं विधायक कालीचरण सरोफ ने कहा कि यह पद्धति श्रेष्ठ है। पौधों के रस से इस पद्धति में चिकित्सा होती है। राजस्थान सरकार द्वारा राज्य में इस चिकित्सा पद्धति का विकास राष्ट्र के लिए लाभदायी है। राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने बताया कि इस पद्धति में अभी 114 पौधों से उपचार किया जा रहा है।

इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा बोर्ड के अध्यक्ष हेमन्त सेठिया ने इस चिकित्सा पद्धति को राजस्थान में आरम्भ करने की संघर्ष यात्रा की जानकारी बताई।

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