प्रयागराज , सितंबर 16 -- इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बुधवार को छात्रों ने फीस वृद्धि, सीटों में कटौती, जर्जर बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक अनदेखी के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।

आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि वे 10 जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। छात्रों ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत उनके खिलाफ निलंबन और मुकदमा दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की जा रही है।

छात्रों ने राष्ट्रपति को खून से लिखा पत्र भेजकर विश्वविद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया है। पत्र में छात्रों ने कार्यवाहक कुलपति संगीता श्रीवास्तव के कार्यकाल को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें दोबारा कुलपति नियुक्त नहीं किए जाने की मांग की है। छात्र नेता आशुतोष मौर्य और अनुराग यादव ने संयुक्त बयान में कहा कि जब तक फीस वृद्धि और सीटों में कटौती पर रोक नहीं लगाई जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर छात्र भूख हड़ताल भी शुरू कर सकते हैं। छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि स्थायी प्रॉक्टर की नियुक्ति होने तक वे किसी कार्यवाहक अधिकारी से वार्ता नहीं करेंगे।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने विधि संकाय की लाइब्रेरी की छत से पानी टपकने, केंद्रीय पुस्तकालय में जलभराव तथा छात्रावासों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया। उनका कहना है कि विधि संकाय की लाइब्रेरी की जर्जर छत के कारण कभी भी हादसा हो सकता है।

छात्रों ने प्रतिवर्ष होने वाली फीस वृद्धि पर रोक लगाने, सीटों में की गई कटौती वापस लेने, कार्यवाहक कुलपति संगीता श्रीवास्तव का इस्तीफा और उन्हें दोबारा कुलपति नियुक्त नहीं करने, स्थायी प्रॉक्टर की नियुक्ति, छात्र नेताओं की प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने तथा केंद्रीय पुस्तकालय एवं छात्रावासों की जर्जर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की मांग की।

धरने में आशुतोष मौर्य, अनुराग यादव, प्रियांशु विद्रोही, गौरव गोंड, मंदीप, ऋषि, सचिन, रोशन, दीपांशु, जामी, अंश यादव और अश्वनी मौर्य समेत अन्य छात्र नेता मौजूद रहे।

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