जगदलपुर , सितंबर 23 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में खेती से पर्याप्त आय नहीं होने के बाद इमली चपाती निर्माण का व्यवसाय शुरू करने वाले किसान डमरू कश्यप अब आत्मनिर्भर उद्यमी बन गए हैं।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना से मिली सहायता के बाद शुरू की गई उनकी इकाई का वार्षिक कारोबार करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गया है और इससे दो स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिला है।
जिले के ग्राम कुम्हारवंड निवासी आठवीं तक शिक्षित डमरू कश्यप मूल रूप से किसान हैं। खेती से परिवार के लिए पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण उन्होंने आय का अतिरिक्त स्रोत तलाशना शुरू किया। बस्तर में बड़ी मात्रा में उपलब्ध इमली को देखते हुए उन्होंने इसके प्रसंस्करण से जुड़ा व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया और इमली चपाती निर्माण की इकाई स्थापित करने की योजना बनाई।
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जगदलपुर की ओर से आयोजित एक शिविर में उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने परियोजना तैयार कर भारतीय स्टेट बैंक की बकावंड शाखा में ऋण के लिए आवेदन किया।
बैंक से उन्हें 70 हजार रुपये का ऋण मंजूर हुआ। योजना के तहत 35 हजार 840 रुपये का शासकीय अनुदान भी मिला। वित्तीय सहायता मिलने के बाद उन्होंने इमली चपाती का उत्पादन शुरू किया।
डमरू कश्यप द्वारा तैयार इमली चपाती की स्थानीय हाट-बाजारों के साथ अन्य क्षेत्रों में भी मांग बढ़ी है। वर्तमान में उनकी सूक्ष्म इकाई का वार्षिक कारोबार करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही उन्होंने दो स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है।
खेती के साथ सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण को आय का जरिया बनाकर डमरू कश्यप ने स्थानीय वनोपज के मूल्य संवर्धन और स्वरोजगार की दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
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