भुवनेश्वर , जून 19 -- इनटैक ने भुवनेश्वर अदालत के भीतर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक प्रतिमा की दयनीय हालत पर गहरी चिंता जताते हुए आरोप लगाया है कि यह स्मारक वर्षों से क्षतिग्रस्त और उपेक्षित पड़ा है।

इनटैक के भुवनेश्वर शाखा के संयोजक अनिल धीर के अनुसार, यह प्रतिमा पहले पुराने भुवनेश्वर अदालत परिसर में स्थापित थी। नये परिसर के निर्माण के दौरान इसे परिसर के एक कोने में इस सोच के साथ हटाकर रख दिया गया था कि नयी इमारत का काम पूरा होने के बाद इसे फिर से स्थापित किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान नुकसान पहुँचा था और तब से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

श्री धीर ने बताया कि नए अदालत परिसर का उद्घाटन दिसंबर 2024 में राज्यपाल और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति में राष्ट्रपति ने किया था, लेकिन इस प्रतिमा की न तो मरम्मत की गई और न ही इसे सही स्थान पर लगाया गया है।

संयोजक ने कहा कि वकीलों और अधिकारियों से की गई पूछताछ से पता चलता है कि इस मुद्दे को कई बार उठाया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा के विधि मंत्री के एक निरीक्षण दौरे के दौरान भी इस प्रतिमा की दयनीय स्थिति की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया गया था। उन्होंने बताया कि फरवरी 2024 में, अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (आईएचआरसी) की ओडिशा शाखा ने इस मामले को लेकर कैपिटल थाने में एक पुलिस शिकायत भी दर्ज करायी थी। इसके अलावा कई मीडिया रिपोर्टों में भी इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया था।

श्री धीर ने कहा कि यह स्थान ओडिशा राज्य संग्रहालय के ठीक सामने है और भुवनेश्वर-पूरी मार्ग का उपयोग करने वाले बड़ी संख्या में वकीलों, न्यायाधीशों, छात्रों, सरकारी अधिकारियों और राहगीरों को साफ दिखाई देता है। इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण और नेताजी की विरासत का अपमान बताते हुए उन्होंने अधिकारियों से मूर्ति की मरम्मत करने, इसे पुराना रूप देने और किसी उपयुक्त सार्वजनिक स्थान पर स्थानांतरित करने का आग्रह किया है।

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