नैनीताल , अक्टूबर 13 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इथियोपिया में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रूप से बंधक बनाकर रखे जाने संबंधी मामले में आपसी समझौते के बाद सभी प्रकार की आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी हैं।

न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मनदीप सिंह की याचिका पर विगत आठ अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। आदेश की प्रति आज उपलब्ध हुई। मामला ऊधमसिंह नगर के गदरपुर से जुड़ा हुआ है।

इसी वर्ष आठ अप्रैल को गदरपुर थाना में एक मामला दर्ज हुआ जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आव्रजन अधिनियम की धारा 10, 16 व 24(जी) की धाराएं आरोपित की गईं।

शिकायतकर्ता राजकुमार की ओर से आरोप लगाया गया कि उनके भतीजे रोहित कुमार को हिमांशु शर्मा के जरिए रोजगार के लिए इथियोपिया भेजा गया। कुल 15 लाख रुपये तय हुए थे, जिनमें से 5.65 लाख रुपये अग्रिम लिए गए। रोहित को भारत से बैंकॉक और दुबई होते हुए इथियोपिया भेजा गया, जिसके बाद उससे संपर्क टूट गया।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि रोहित को वहां बंधक बनाकर रखा गया। प्राथमिकी में याचिकाकर्ता मनदीप के अलावा हिमांशु शर्मा, अभिमन्यु, श्वेता, त्रिलोचन सिंह और अज्ञात लोगों की संलिप्तता बताई गई। एक भारतीय कंसल्टेंसी से संपर्क के बाद रोहित को किसी तरह भारत वापस लाया गया।

याचिकाकर्ता मनदीप सिंह की ओर से कहा गया कि उन्हें केवल पीड़ित के बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया है। उनकी कोई विशिष्ट या प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता और पीड़ित से ली गई रकम उन्हें लौटाई जा चुकी है।

न्यायालय ने प्रतिवादियों से बातचीत के आधार पर पाया कि समझौता स्वेच्छा से, बिना किसी दबाव या प्रभाव के हुआ है। प्रतिवादियों ने साफ कहा कि वे आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाना चाहते। हालांकि राज्य की ओर से अपराध के निपटारे के लिए आवेदन का विरोध किया गया।

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