रांची , जून 03 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शराब घोटाले के मुख्य सूत्रधार अनवर ढेबर पर ईडी की कार्रवाई को लेकर सीएम हेमंत सोरेन पर हमला बोला है।
श्री मरांडी ने का कि पद का दुरुपयोग कर अपने नाम पर खदान लीज़ लेने के मामले में जब सदस्यता जाने का खतरा मंडरा रहा था, तब हेमंत सोरेन विधायकों को लेकर इधर-उधर भटक रहे थे। सवाल यह है कि आखिर उन्होंने छत्तीसगढ़ को ही क्यों चुना? जबकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में भी विपक्ष की सरकारें थीं। फिर ऐसा क्या था छत्तीसगढ़ में, और कौन था वहां, जिसके भरोसे हेमंत सोरेन सीधे विधायकों को लेकर रायपुर के रिसॉर्ट में ठहर गए?श्री मरांडी ने कहा कि आज झारखंड-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मुख्य सूत्रधार अनवर ढेबर पर ईडी की कार्रवाई की तपिश हेमंत सोरेन तक भी जरूर पहुंच रही होगी। उन्हें यह जवाब देना ही होगा कि आखिर अनवर ढेबर ने उस मेजबानी पर करोड़ों रुपये क्यों खर्च किए?उन्होंने कहा कि झारखंड में भले एसीबी की आड़ लेकर शराब घोटाले से जुड़े सबूतों को कमजोर करने की कोशिश हुई हो, भले पूरा दोष केवल विनय चौबे पर डालने के लिए मनगढ़ंत कहानियां गढ़ी गई हों, भले कई आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई हो, लेकिन इस पूरे प्रकरण की राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
श्री मरांडी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि सत्ता और लोकप्रियता का भ्रम हमेशा स्थायी नहीं होता। लालू यादव भी कभी इसी विश्वास में थे कि उनकी राजनीतिक ताकत के सामने जांच एजेंसियां कुछ नहीं कर पाएंगी। उन्होंने स्वयं कभी चारा नहीं ढोया था, लेकिन घोटाले को संरक्षण देने के आरोप में कानून ने उन्हें भी नहीं छोड़ा। विडंबना देखिए कि उन्हें सजा उसी दौर में मिली, जब केंद्र में उनकी अपनी यूपीए सरकार थी।
श्री मरांडी ने कहा कि, हेमंत जी, कई बार चेतावनी और सलाह दिए जाने के बावजूद आपने शराब नीति में ऐसे बदलाव किए, जिससे झारखंड को हजारों करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका पैदा हुई। सत्ता अस्थायी हो सकती है, लेकिन फैसलों का हिसाब स्थायी होता है। जनता सब देख रही है, और कानून भी देर-सवेर हर निर्णय का जवाब जरूर मांगता है।
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