त्रिशूर/कोच्चि , जून 18 -- प्रसिद्ध फ्रांसीसी-अल्जीरियाई कलाकार और क्यूरेटर कादेर अत्तिया ने कहा है कि वह इतिहास को न केवल राजनीति के माध्यम से बल्कि कविता, कल्पना और अनिश्चितता के माध्यम से भी देखते हैं। समकालीन कला का केंद्र बिंदु भी यही है।

उन्होंने यह बात 'कोच्चि-मुज़िरिस द्विवार्षिक कला प्रदर्शनी' के अध्यक्ष जितेश कल्लाट से इस प्रदर्शनी के सातवें संस्करण का क्यूरेटर नियुक्त किए जाने के बाद एक बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनियों को ऐसे स्थान बनना चाहिए जहाँ विचारों पर सवाल उठाए जाएँ, संवाद को बढ़ावा दिया जाए और दर्शक केवल देखने के बजाय सक्रिय रूप से भाग लें।

श्री अत्तिया ने अपनी कलाकृतियों में "फैंटम लिम्ब" (यानी वह न्यूरोलॉजिकल स्थिति जिसमें शरीर का कोई अंग कट जाने के बाद भी मस्तिष्क को उसके होने और उसमें दर्द या खुजली का आभास होता रहता है) के वैज्ञानिक व दार्शनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस अद्वितीय शोध ने उन्हें यह समझने के लिए प्रेरित किया कि किस तरह मनुष्य का मस्तिष्क अतीत के नुकसान या अदृश्य यादों को संजोकर रखता है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य, शल्य चिकित्सा के आघात, आध्यात्मिकता और सामूहिक ऐतिहासिक स्मृति (बीते वक्त के अनकहे घावों) के गहरे अंतर्संबंधों को तलाशने का प्रयास किया है।

इस बातचीत में श्री अत्तिया ने याद किया कि पेरिस के बहुसांस्कृतिक उपनगरों में पले-बढ़े होने के कारण उन्हें विभिन्न धर्मों, जातियों और परंपराओं के लोगों के बीच रहने का अनुभव मिला। इस तजुर्बे ने उनके कलात्मक अनुभव को गहराई से प्रभावित किया। संस्कृतियों, इतिहासों और परंपराओं वाले कोच्चि के अनूठे मिश्रण ने उनके दृष्टिकोण को आकार देने में महती भूमिका निभाई है। श्री अत्तिया ने कोच्चि की अपनी पहली यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि शहर की सड़कें और चेहरे सदियों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ऐतिहासिक परतों को दर्शाते हैं। यह खासियत, इसे किसी भी दूसरी जगह से जुदा कर देती है।

युवा प्रतिभाओं को निखारने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री अत्तिया ने छात्र कला प्रदर्शनी कार्यक्रम की प्रशंसा की और इसे एक अमूल्य मंच बताया जो उभरते कलाकारों को जनता के साथ जुड़ने और सार्थक कलात्मक अनुभव देता है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कलात्मक अभ्यास के लिए शिक्षा मौलिक वस्तु है।

श्री कल्लाट ने उल्लेख किया कि कोच्चि-मुज़िरिस द्विवार्षिक कला प्रदर्शनी ने बातचीत, सीखने और सहयोग के लिए मंच तैयार करके छोटे कस्बों और शहरों के कलाकारों के लिए अवसरों का विस्तार किया है, जिससे पूरे भारत में कला तक पहुँच के अंतर को पाटने में मदद मिली है।

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