इटावा , अप्रैल 16 -- देश की संसद में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर चर्चा के बीच उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के बाद महिला मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर से पहले जिले में कुल 12,29,631 मतदाता थे, जिनमें 6,59,918 पुरुष और 5,69,691 महिला मतदाता शामिल थीं। शुद्धिकरण प्रक्रिया के दौरान 84,078 पुरुषों के नाम सूची से हटाए गए, जबकि 94,914 महिला मतदाताओं के नाम काटे गए। इसके बाद जिले में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 10,50,636 रह गई, जिसमें 5,75,840 पुरुष और 4,74,777 महिला मतदाता शामिल हैं।
महिला मतदाताओं के अधिक नाम कटने से मतदाता सूची के लिंगानुपात पर भी असर पड़ा है। जिला निर्वाचन विभाग के अनुसार, आलेख्य प्रकाशन के समय यह अनुपात 817 तक पहुंच गया था, जिसे विशेष अभियान चलाकर 824 तक किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महिलाओं के नाम अधिक कटने के पीछे पहचान सत्यापन के कड़े मानदंड एक प्रमुख कारण रहे। कई महिलाओं को मायके पक्ष के आवश्यक दस्तावेज, जैसे माता-पिता का मतदाता सूची में नाम आदि, समय पर उपलब्ध नहीं हो सके। विवाह के बाद वर्षों से मायके से संपर्क टूट जाने अथवा परिवार के अन्यत्र बस जाने के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकीं।
विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों के अनुसार, इटावा सदर सीट पर महिला मतदाताओं की संख्या में सर्वाधिक कमी दर्ज की गई। एसआईआर से पहले यहां 1,95,065 महिला मतदाता थीं, जो बाद में घटकर 1,55,115 रह गईं। इस प्रकार यहां 39,950 महिला मतदाताओं के नाम कम हुए। इस सीट से भाजपा की सरिता भदौरिया विधायक हैं।
वहीं जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाताओं के नाम सबसे कम कटे हैं। इस सीट पर 26,592 महिला मतदाता कम हुई हैं। यहां समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव विधायक हैं।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनंदन श्रीवास्तव ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अधिकांश हटाए गए नाम स्थानांतरित, दोहराव अथवा मृतक मतदाताओं के थे। साथ ही महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया।
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