इटावा , सितंबर 14 -- उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में ऊसराहार पुलिस और सर्विलांस टीम ने सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतरजनपदीय साइबर ठग और मास्टरमाइंड नवल किशोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से फर्जी नियुक्ति पत्र, विभिन्न सरकारी विभागों की मोहरें, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, अपाचे मोटरसाइकिल और 10 हजार रुपये बरामद किये हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने सोमवार को बताया कि गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ औरैया और कन्नौज जिलों में चार आपराधिक मामले दर्ज हैं। आरोपी उत्तर प्रदेश पुलिस, होमगार्ड, रेलवे पुलिस, फार्मासिस्ट और भारतीय सेना समेत विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर लोगों से ऑनलाइन रकम ऐंठता था।
उन्होंने बताया कि एनसीआरबी पोर्टल पर प्राप्त शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि नवल किशोर खुद को लखनऊ सचिवालय में अच्छी पहुंच वाला बताकर एसजीपीजीआई लखनऊ में फार्मासिस्ट की नौकरी लगवाने का झांसा देता था। इसके लिए वह सात लाख रुपये की मांग करता था और फाइल चार्ज व अन्य खर्चों के नाम पर करीब दो लाख रुपये अग्रिम ऑनलाइन खाते में जमा करा लेता था। शेष रकम नौकरी लगने के बाद देने को कहता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने राहुल कुमार से उत्तर प्रदेश पुलिस में नौकरी लगवाने के नाम पर 50 हजार रुपये, रानी देवी से होमगार्ड में भर्ती कराने के नाम पर 50 हजार रुपये तथा अर्जुन सिंह से एसजीपीजीआई लखनऊ में फार्मासिस्ट की नौकरी लगवाने के नाम पर 80 हजार रुपये लिये थे।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर लोगों को देता था। इनमें एसजीपीजीआई लखनऊ के निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर और मोहर लगी होती थी। इसी तरह होमगार्ड परीक्षा में असफल रीना देवी को सफल दर्शाते हुए फर्जी दस्तावेज भी भेजे गये थे। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वर्तमान में पुलिस और होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया का फायदा उठाकर वह गांवों के युवाओं को नौकरी लगवाने का झांसा देता था। उनसे फाइल चार्ज और अन्य खर्चों के नाम पर अपने खाते में रुपये जमा कराता और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर बनाकर देता था। नौकरी के संबंध में बार-बार फोन आने पर वह मोबाइल बंद कर देता या नंबर बदल लेता था। किसी को संदेह होने पर वह चेक काटकर देने का प्रयास करता था। पुलिस के अनुसार बरामद 10 हजार रुपये भी ठगी से प्राप्त रकम है, जबकि बाकी रकम वह अपने शौक पूरे करने में खर्च कर चुका है।
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